कुंभ मेला व्यवस्थाओं पर संत समाज में असंतोष, आर्थिक पारदर्शिता पर उठे सवाल!
हरिद्वार (दर्पण न्यूज 24/7)।
देश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों कुंभ एवं अर्धकुंभ मेलों की व्यवस्थाओं को लेकर संत समाज के एक वर्ग में असंतोष सामने आया है। कुछ साधु-संतों ने आरोप लगाया है कि कुंभ मेला प्रशासन द्वारा अखाड़ों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता एवं सुविधाओं का लाभ सभी साधुओं तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है।
श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने कहा कि नासिक, उज्जैन, प्रयागराज और हरिद्वार में आयोजित कुंभ मेलों के दौरान अखाड़ों को टेंट, बिजली, पानी तथा अन्य व्यवस्थाओं के लिए करोड़ों रुपये की सहायता प्रदान की जाती है, लेकिन कई साधुओं को मूलभूत सुविधाएं स्वयं के स्तर पर करनी पड़ती हैं। उन्होंने व्यवस्थाओं के नाम पर धन संग्रह किए जाने का भी आरोप लगाया।
संतों ने भूमि आवंटन, प्लॉट व्यवस्था तथा महामंडलेश्वर पद प्रदान करने के नाम पर आर्थिक लेन-देन होने की आशंका जताई है। इसके अलावा कुंभ स्नान के बाद आयोजित भंडारों एवं धार्मिक कार्यक्रमों में भी धन लिए जाने की बात कही गई है। बाहरी राज्यों से प्राप्त दान एवं राशन सामग्री के वितरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
अखाड़ों की कार्यप्रणाली को लेकर संत समाज में मतभेद भी सामने आए हैं। कुछ संतों का कहना है कि पूर्व में कई अखाड़े बिना सरकारी आर्थिक सहायता के व्यवस्थाएं संचालित करते थे, जबकि वर्तमान में पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद अतिरिक्त सहायता की मांग की जा रही है।
इस दौरान अखाड़ा परिषद की भूमिका को लेकर भी विवाद सामने आया। संतों का आरोप है कि सभी मान्यता प्राप्त अखाड़ों की सहमति के बिना कुछ पदाधिकारी पूरे संत समाज का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहे हैं, जबकि मेला प्रशासन की बैठकों में अखाड़ों को आमंत्रित किया जाता है, परिषद को नहीं।
मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था को लेकर भी मतभेद व्यक्त किए गए हैं। संतों का कहना है कि मंदिर की संपत्ति पारंपरिक रूप से गोस्वामी परंपरा से जुड़ी रही है और इसकी प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्पष्टता आवश्यक है।
संत समाज के एक वर्ग ने कुंभ मेला व्यवस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, वित्तीय लेखा-जोखा सार्वजनिक करने तथा परंपराओं के अनुरूप व्यवस्थाएं लागू करने की मांग की है। आगामी कुंभ एवं सिंहस्थ आयोजनों से पूर्व इस विषय पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता बताई जा रही है।
