








हालिसकम नृत्य के आध्यात्मिक रहस्य से गूंजा कथा पंडाल!
सप्तम दिवस पर ब्यासाचार्य ने रासलीला के माध्यम से बताया कि भक्ति ही परमात्मा तक पहुंचने का है सबसे सरल मार्ग।
दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़/लालकुआं।
हरिपुर भानदेव स्थित कालिका मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान ब्यासाचार्य नमन कृष्ण महाराज ने ‘हालिसकम नृत्य’ के आध्यात्मिक रहस्य का वर्णन करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा व्यास ने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दौरान जो गोलाकार समूह नृत्य होता है, उसे ही ‘हालिसकम नृत्य’ कहा जाता है। इस नृत्य में प्रत्येक गोपी को यह अनुभूति होती है कि श्रीकृष्ण केवल उसी के साथ हैं, जो ईश्वर की सर्वव्यापकता और भक्त के प्रति उनके असीम प्रेम का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि यह नृत्य केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के मिलन का दिव्य प्रतीक है। वृत्ताकार मंडल में किया जाने वाला यह नृत्य अनंतता, एकता और अखंडता का संदेश देता है, जहां भक्ति अपने चरम पर पहुंचकर साधक को ईश्वर में पूर्णतः लीन कर देती है।
कथा के दौरान श्रद्धालु ‘राधे-राधे’ और ‘श्याम’ के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे। भजनों और कीर्तन के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का रसास्वादन करते नजर आए।
अंत में ब्यासाचार्य ने कहा कि वर्तमान युग में यदि मनुष्य सच्चे भाव से भगवान का स्मरण और भक्ति करे, तो उसे जीवन में शांति, संतुलन और मोक्ष की प्राप्ति संभव है। सप्तम दिवस की कथा ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।आयोजकों ने बताया कि कल हवन यज्ञ और विशाल भंडारे और वैदिक विधिविधान के साथ कथा का पारायण किया जाएगा। आज की कथा में पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल,घनानंद भट्ट,किसान सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष मोहन चंद्र दुर्गापाल,चैतन्य एकेडमी के प्रबंधक के सी कर्नाटक, हेम तिवारी,बिशन दत्त दुमका,शंकर जोशी,हंसा फुलारा,भुवन चंद्र कबड़वाल,गोपाल दत्त कांडपाल समेत सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भागवत कथा माहात्म्य का रसपान कर पुण्य अर्जित किया।
