“ट्रांसफर में भ्रष्टाचार, मुख्यमंत्री खुद कर रहे प्रमोट!” वेणुगोपाल के वार से गरमाई उत्तराखंड की सियासत, भाजपा ने दिया करारा जवाब!
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में तबादलों में भ्रष्टाचार हो रहा है और “मुख्यमंत्री स्वयं भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।”
वेणुगोपाल के इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार, सुशासन और युवाओं के मुद्दे को प्रमुख चुनावी हथियार बनाएगी।
वेणुगोपाल ने कांग्रेस की कथित गुटबाजी की चर्चाओं को भी खारिज करते हुए कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने विश्वास जताया कि मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस उत्तराखंड में मजबूती से चुनाव लड़ेगी और सत्ता में वापसी करेगी।
इसी कड़ी में कांग्रेस ने 17 जुलाई को राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे का भी ऐलान किया है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार राहुल गांधी छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे। जून में स्थगित हुआ यह दौरा अब कांग्रेस के लिए युवाओं तक पहुंच बनाने का बड़ा राजनीतिक अभियान माना जा रहा है।
भाजपा का पलटवार— “झूठ और भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही कांग्रेस”
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने भी तुरंत मोर्चा संभाल लिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस के सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि धामी सरकार में सभी फैसले पारदर्शिता और नियमों के अनुसार लिए जाते हैं। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस अपनी आंतरिक कलह और संगठनात्मक कमजोरियों से ध्यान हटाने के लिए बेबुनियाद आरोपों की राजनीति कर रही है।
भाजपा ने दावा किया कि जनता विकास कार्यों और सरकार की नीतियों को देख रही है, इसलिए केवल आरोप लगाने से राजनीतिक लाभ मिलने वाला नहीं है।
कुल मिलाकर उत्तराखंड की राजनीति अब चुनावी मोड में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। कांग्रेस भ्रष्टाचार, ट्रांसफर नीति और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है, जबकि भाजपा विकास, पारदर्शिता और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताकर जवाबी हमला कर रही है।
आरोप और प्रत्यारोपों की इस सियासी जंग में फिलहाल बयानबाजी तेज है, अब देखना होगा कि यह राजनीतिक संघर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव तक किस दिशा में जाता है। अंतिम फैसला उत्तराखंड की जनता ही करेगी।
