

बिंदुखत्ता के राजस्व ग्राम आंदोलन को मिली नई पीढ़ी की आवाज, 12 वर्षीय सोनाली ने 55 सेकंड में उठाए बड़े सवाल!
धरने के 25वें दिन शीशम भुजिया ग्राम सभा की भागीदारी, ‘जेन अल्फा’ की सक्रिय मौजूदगी ने आंदोलन को दिया नया आयाम!
लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित कराने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में अब नई पीढ़ी की भागीदारी भी सामने आने लगी है। लालकुआं तहसील परिसर में वनाधिकार संगठन बिंदुखत्ता और पूर्व सैनिक संगठन बिंदुखत्ता के संयुक्त नेतृत्व में चल रहे अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन के 25वें दिन शीशम भुजिया ग्राम सभा ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस दौरान 12 वर्षीय सोनाली भट्ट के महज 55 सेकंड के संबोधन ने आंदोलन को एक नया संदेश दिया। वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट की बेटी सोनाली ने अपनी बात रखकर यह संकेत दिया कि बिंदुखत्ता के भविष्य से जुड़ा सवाल अब केवल बुजुर्गों, सामाजिक कार्यकर्ताओं या पूर्व सैनिकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नई पीढ़ी भी इसे अपने अधिकारों से जोड़कर देख रही है।
55 सेकंड का संबोधन, सवाल पूरे सिस्टम से!
धरना स्थल पर जब आंदोलनकारी और ग्रामीण अपनी बात रख रहे थे, उसी दौरान सोनाली भट्ट का संक्षिप्त संबोधन चर्चा का केंद्र बन गया। अपने अंदाज में उन्होंने बिंदुखत्ता के लोगों से लेकर शासन-प्रशासन तक यह संदेश पहुंचाया कि राजस्व ग्राम की मांग को लेकर हर आयु वर्ग अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
सोनाली की भागीदारी ने आंदोलन के सामने एक अहम सवाल भी खड़ा किया है—जिस क्षेत्र की कई पीढ़ियां राजस्व ग्राम की मांग उठाती रही हैं, वहां इस मांग के समाधान का इंतजार आखिर कब तक जारी रहेगा? 55 सेकंड की इस आवाज की अहमियत केवल उसकी कम उम्र में नहीं, बल्कि उस मुद्दे में है, जो बिंदुखत्ता के हजारों निवासियों के अधिकारों और भविष्य से जुड़ा है।
धरने के 25 दिन बाद भी मांग पर नजरें!
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना अब अपने 25वें दिन में प्रवेश कर चुका है। वनाधिकार संगठन और पूर्व सैनिक संगठन के नेतृत्व में चल रही इस मुहिम में अलग-अलग ग्राम सभाओं की भागीदारी आंदोलन को व्यापक आधार देने का प्रयास है।
आंदोलनकारियों की मांग है कि वनाधिकार अधिनियम, 2006 (FRA2006) के प्रावधानों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाते हुए बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की दिशा में ठोस कार्रवाई की जाए। अब इस मुहिम में युवाओं और बच्चों की भागीदारी भी सामने आने से आंदोलन का सामाजिक दायरा और स्पष्ट हुआ है।
हालांकि, आंदोलन की मांग और राजस्व ग्राम की अधिसूचना की प्रक्रिया के बीच शासन-प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी। ऐसे में सवाल है कि क्या लगातार जारी धरना संबंधित अधिकारियों का ध्यान ठोस समाधान की ओर खींच पाएगा?
पूर्व सैनिकों से ग्रामीणों तक एकजुटता!
धरना-प्रदर्शन में संयोजक कुंदन सिंह कोरंगा और सह-संयोजक भवान सिंह कोरंगा रहे। इस दौरान वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, समिति अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी, पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष सूबेदार मेजर खिलाफ सिंह दानू, कैप्टन दलबीर सिंह कफोला, कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, कैप्टन खुशाल सिंह कोश्यारी, संगठन के उपाध्यक्ष भरत सिंह नेगी, दीपक जोशी, सचिव एडवोकेट बलवंत सिंह बिष्ट, रमेश गोस्वामी, दौलत सिंह कोरंगा, लक्ष्मी दत्त तिवारी, भूपाल सिंह मेहता, डिगर सिंह कोरंगा, नरेंद्र सिंह रौतेला, सुंदर कोरंगा, शेर सिंह मेहता, फकीर सिंह पवार, महिपाल सिंह पवार, नंदी देवी और डिगरी देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
आंदोलन का संदेश साफ—अब समाधान की दरकार
बिंदुखत्ता के राजस्व ग्राम का सवाल अब केवल एक मांग या धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं दिख रहा। इसमें पूर्व सैनिकों का अनुभव, ग्रामीणों की भागीदारी और नई पीढ़ी की आवाज एक साथ सामने आ रही है।
सोनाली भट्ट के 55 सेकंड के संबोधन ने आंदोलन को एक प्रतीकात्मक संदेश जरूर दिया है—बिंदुखत्ता के भविष्य को लेकर अगली पीढ़ी भी सवाल पूछ रही है। अब निगाहें शासन-प्रशासन पर हैं कि वह इस लंबे समय से उठ रही मांग पर कानून के प्रावधानों के अनुरूप क्या ठोस पहल करता है।
