








78 दिन का धरना, तीन मौतें, फिर भी सरकार खामोश
पेंशन की मांग पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों का अनवरत आंदोलन, पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन का खुला समर्थन।
देहरादून।
उत्तराखंड में सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन का लाभ दिलाने की मांग अब मानवीय संकट का रूप ले चुकी है। कार्यप्रभारित अधिष्ठान से नियमित हुए कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन बहाली की मांग को लेकर सेवानिवृत्त कर्मचारी संघर्ष समिति द्वारा 3 अक्टूबर 2025 से लोनििवि परिसर में चलाया जा रहा धरना व क्रमिक अनशन शनिवार को 78वें दिन में प्रवेश कर गया, लेकिन अब तक शासन स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
धरने के दौरान तीन सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मृत्यु हो चुकी है। इसके बावजूद सरकार की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कर्मचारियों और उनके परिजनों का कहना है कि यह आंदोलन अब केवल मांग नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
इस आंदोलन को उत्तरांचल (पर्वतीय) कर्मचारी शिक्षक संगठन, उत्तराखण्ड ने पूर्ण समर्थन देते हुए मुख्य सचिव को पत्र भेजकर सरकार से संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने की मांग की है। संगठन के प्रदेश महामंत्री अशोक राज उनियाल ने कहा कि शीतकाल में दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों से आए बुजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मचारी अत्यंत विषम परिस्थितियों में धरना दे रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और परिवारों को भारी मानसिक व आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि शासनादेश दिनांक 15 सितंबर 2006 के अंतर्गत नियमित हुए कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन से वंचित रखना संवैधानिक भावना और सामाजिक न्याय दोनों के विपरीत है। संगठन ने सवाल उठाया कि जब वर्षों तक सेवा ली गई, तो सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को उनके अधिकार से क्यों वंचित किया जा रहा है।
पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन ने सरकार से मांग की है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तत्काल पेंशन का लाभ प्रदान कर आंदोलन समाप्त कराया जाए, ताकि आगे किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
