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पीढ़ियों से वन भूमि पर बसे ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन। वनाधिकार कानून लागू करने की उठी मांग।
देहरादून/नैनीताल/बिन्दुखत्ता।
जनपद नैनीताल के उन दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने, जो पीढ़ियों से वन भूमि पर बसे हैं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर वनाधिकार कानून-2006 को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि संसद द्वारा वर्ष 2006 में पारित यह कानून ऐतिहासिक अन्याय के समाधान के लिए बनाया गया था, लेकिन उत्तराखंड में 19 वर्ष बीत जाने के बाद भी इसकी प्रगति लगभग शून्य है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 71 प्रतिशत वन क्षेत्र वाले राज्य में लाखों वनाश्रित परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं, सरकारी योजनाओं और वैधानिक अधिकारों से वंचित हैं। आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता और जागरूकता के अभाव में पात्र समुदाय को कानूनी संरक्षण नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से वन भूमि पर बसे परिवार आज भी “अवैध” की श्रेणी में गिने जाते हैं, जिससे न तो उन्हें पट्टा मिलता है और न ही सरकारी योजनाओं का कोई लाभ। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री शीघ्र हस्तक्षेप कर उनके ऐतिहासिक अधिकारों को बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
ज्ञापन में समाजसेवी वरिष्ठ पत्रकार बसंत पांडे,प्रमोद कालोनी,कुंदन मेहता,किशन सिंह बघरी समेत सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।

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