अंकिता हत्याकांड पर सड़कों पर जनसैलाब, सीबीआई जांच की मांग तेज़ — 11 जनवरी को ‘उत्तराखंड बंद’ का एलान
दर्पण न्यूज 24/7 | देहरादून।
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राज्यभर में जनआक्रोश चरम पर पहुंच गया है। रविवार को देहरादून, हरिद्वार और अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर सीबीआई से निष्पक्ष जांच की मांग की। आंदोलनकारियों ने 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का एलान करते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।
परेड ग्राउंड से सीएम आवास तक मार्च
वीआईपी नाम को लेकर चल रही सियासत के बीच प्रदेश के कोने-कोने से लोग देहरादून पहुंचे। कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, वामपंथी दलों, महिला संगठनों और सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया।
“अंकिता हम शर्मिंदा हैं” और “सीबीआई जांच कराओ” जैसे नारों से शहर गूंज उठा। हालांकि, हाथीबड़कला के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।
कांग्रेस का सरकार पर सीधा हमला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस शुरू से इस मामले में सरकार को जगाने का काम कर रही है, लेकिन तीन साल बाद भी अंकिता को न्याय नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कथित वीआईपी के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम की भूमिका सामने आई, तो भाजपा सरकार चुप्पी साध गई।
सरकार पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने सेलाकुई मुख्य बाजार में कैंडल मार्च निकाला। चकराता विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह तथा वरिष्ठ नेता आर्येन्द्र शर्मा के नेतृत्व में हुए मार्च में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। प्रीतम सिंह ने कहा कि नए खुलासों के बाद भी सरकार तथाकथित वीआईपी को बचाने में जुटी है।
हरिद्वार और सल्ट में भी उबाल
हरिद्वार में जिला महानगर कांग्रेस कमेटी ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में ‘अंकिता को न्याय दो’ पदयात्रा निकाली। शिवमूर्ति से कोतवाली तक निकली यात्रा को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार में बेटियां असुरक्षित हैं और एनसीआरबी रिपोर्ट महिला अपराधों की भयावह स्थिति उजागर करती है।
अल्मोड़ा जिले के सल्ट में कांग्रेस नेता करण माहरा के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुआ। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने आरोप लगाया कि जुलूसों और कैंडल मार्च के बावजूद सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने वनंतरा रिसॉर्ट पर बुलडोज़र कार्रवाई को साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश बताते हुए सीबीआई जांच की मांग दोहराई।
सरकार का जवाब
वहीं, राज्य सरकार की ओर से मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि एसआईटी जांच के जरिए दोषियों को सज़ा दिलाई गई है और हालिया ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। मंत्री ने दो टूक कहा कि दोषी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
— दर्पण न्यूज 24/7
