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अजब-गजब: दिलों की धड़कन बचाने वाले डॉक्टर का अपना दिल दे गया धोखा, 10 डॉक्टर भी नहीं लौटा सके सांसें!

दर्पण न्यूज 24/7 रोहतक। इसे नियति का अजीब संयोग कहें या जिंदगी का सबसे बड़ा विरोधाभास। जो डॉक्टर रोज़ाना हार्ट अटैक के मरीजों को नई जिंदगी देते थे, वही खुद हार्ट अटैक का शिकार हो गए। हैरानी की बात यह रही कि उन्हें बचाने के लिए 10 से ज्यादा वरिष्ठ डॉक्टरों ने करीब तीन घंटे तक जी-जान लगा दी, लेकिन जिंदगी की जंग नहीं जीती जा सकी।

रोहतक के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य बत्रा बुधवार को दिनभर मरीजों के इलाज में व्यस्त रहे। उन्होंने दो जटिल हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कीं और शाम करीब साढ़े आठ बजे अपने सेक्टर-2 स्थित आवास पहुंचे। घर पहुंचते ही वह सीधे बाथरूम में गए। काफी देर तक बाहर नहीं आए तो पत्नी डॉ. मयंका बत्रा ने उन्हें फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

जब चिंता बढ़ी तो सुरक्षा कर्मियों की मदद से बाथरूम का दरवाजा तोड़ा गया। अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। डॉ. बत्रा अचेत अवस्था में फर्श पर पड़े थे। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां तीन घंटे तक लगातार सीपीआर और अन्य जीवनरक्षक प्रयास किए गए। 10 से अधिक वरिष्ठ चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन देर रात करीब 1:30 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उनकी मौत हार्ट फेल होने से हुई।

45 वर्षीय डॉ. आदित्य बत्रा ने पीजीआईएमएस रोहतक से एमबीबीएस और एमडी तथा एसजीपीजीआई, लखनऊ से डीएम (कार्डियोलॉजी) की पढ़ाई की थी। एम्स दिल्ली, फोर्टिस अस्पताल और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं देने के बाद वह रोहतक में होली हार्ट एडवांस्ड कार्डियक केयर एंड रिसर्च सेंटर का नेतृत्व कर रहे थे।

करीब एक वर्ष पहले उन्हें कथित रूप से रंगदारी की धमकी भी मिली थी, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। वह सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय थे।

डॉ. बत्रा अपने पीछे पत्नी, एक बेटी और एक बेटे को छोड़ गए हैं। उनके निधन से चिकित्सा जगत ही नहीं, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बीमारी किसी व्यक्ति के पेशे को देखकर नहीं आती। जो डॉक्टर हर दिन सैकड़ों दिलों की धड़कनों को संभालते थे, नियति ने उसी डॉक्टर की धड़कनें हमेशा के लिए थाम दीं।

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