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13 साल से जेल में बंद ‘नाबालिग कैदी’ को राहत; हाईकोर्ट ने तत्काल रिहाई का दिया आदेश।

दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो।
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत बड़ा फैसला सुनाते हुए हत्या के मामले में 13 साल से जेल में बंद एक कैदी को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद कहा कि अपराध के समय आरोपी की उम्र मात्र 15 वर्ष थी, ऐसे में उसे दी गई उम्रकैद की सजा कानूनन वैध नहीं ठहराई जा सकती।
न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। मामला वर्ष 2003 में रुड़की की एक हत्या और लूट के प्रयास से जुड़ा है, जिसमें आरोपी को सत्र न्यायालय ने दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस सजा को बाद में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
लेकिन वर्ष 2021 में आरोपी ने जेल से आवेदन भेजकर दावा किया कि वारदात के समय वह नाबालिग था। इस पर कोर्ट ने रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल से विस्तृत जांच कराई। स्कूल रिकॉर्ड, स्कॉलर रजिस्टर और गवाहों के बयान के आधार पर उसकी जन्मतिथि 22 मई 1988 पाई गई, जिससे पुष्टि हुई कि घटना के समय उसकी उम्र लगभग 15 वर्ष 1 महीना थी।
कोर्ट ने माना कि नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत तीन साल से अधिक सुधार गृह में नहीं रखा जा सकता और उसे उम्रकैद भी नहीं दी जा सकती। चूंकि आरोपी पहले ही 13 साल से अधिक सजा काट चुका है, इसलिए हाईकोर्ट ने उसकी तत्काल रिहाई के आदेश दिए।

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