तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगलों में लकड़ी तस्करों का नेटवर्क बेखौफ! हल्द्वानी, टांडा रेंज के बाद अब पीपल पड़ाव रेंज तक पहुंची अवैध लकड़ी की जड़ें।
रुद्रपुर। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगलों में अवैध लकड़ी तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। हल्द्वानी रेंज के बाद अब टांडा और पीपल पड़ाव रेंज का नाम भी लगातार सामने आने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। ताजा मामले में टांडा रेंज की स्पेशल टीम ने उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के थाना स्वार क्षेत्र में छापेमारी कर करीब एक लाख रुपये कीमत की आठ गिल्टे अवैध सागौन की लकड़ी बरामद की है। हालांकि तस्कर मौके से फरार होने में सफल रहे।
शुक्रवार सुबह टांडा और पीपल पड़ाव रेंज की संयुक्त स्पेशल टीम वन क्षेत्राधिकारी रूपनारायण गौतम के नेतृत्व में गश्त पर थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि उत्तर प्रदेश के रामपुर जनपद के स्वार क्षेत्र स्थित एक फड़ पर अवैध सागौन की लकड़ी रखी गई है। सूचना पर वन विभाग की टीम ने तत्काल दबिश दी और मौके से आठ गिल्टे सागौन बरामद कर जब्त कर लिए।
वन विभाग ने फरार तस्करों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। कार्रवाई में पीपल पड़ाव रेंज के वन क्षेत्राधिकारी पी.सी. जोशी, वन दरोगा सुरेंद्र सिंह तथा वन आरक्षी अनंगपाल, कैलाश सिंह, नरेंद्र कुशवाहा, दिनेश पाठक और अंकित कुमार शामिल रहे।
बड़ा सवाल… आखिर कब रुकेगी लकड़ी तस्करी?
लगातार सामने आ रहे मामलों ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगल लकड़ी तस्करों के लिए सबसे मुफीद ठिकाना बन चुके हैं? हल्द्वानी रेंज, टांडा रेंज और अब पीपल पड़ाव रेंज से जुड़े मामलों ने वन सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
हालांकि वन विभाग की स्पेशल टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन तस्करों का हर बार फरार हो जाना इस बात का संकेत है कि उनका नेटवर्क अब भी सक्रिय और मजबूत बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या केवल लकड़ी बरामद करना ही पर्याप्त है, या फिर इस पूरे तस्करी नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर उसे ध्वस्त करने की जरूरत है?
