“एफआईआर करो या प्रस्ताव लाओ, सच बोलना नहीं छोड़ूंगा” सरकार विशेषाधिकार प्रस्ताव से पीछे, राहुल गांधी के तेवर तीखे!
नई दिल्ली।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण को लेकर संसद में मचे घमासान के बीच मोदी सरकार ने फिलहाल उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव न लाने का फैसला किया है। हालांकि सत्तापक्ष ने उनके खिलाफ कार्रवाई के संकेत जरूर दिए हैं।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी के विरुद्ध कोई विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाया जा रहा है, लेकिन उन्होंने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक मूल प्रस्ताव पेश करने के लिए नोटिस दिया है।
इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने संसद में कुछ निराधार आरोप लगाए हैं, जिनकी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में उनके भाषण की “गलत बातें” संसद की कार्यवाही से हटाई जा सकती हैं।
दरअसल, लोकसभा में बजट पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील को लेकर मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने जेफरी एपस्टीन फाइल्स का हवाला देते हुए कारोबारी घरानों और कुछ नेताओं से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया था, जिससे सियासी तूफान खड़ा हो गया।
निशिकांत दुबे ने अपने नोटिस में राहुल गांधी पर विदेशों से जुड़े संगठनों और भारत-विरोधी ताकतों से संबंधों का आरोप लगाते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने और आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि मोदी सरकार चाहे विशेषाधिकार प्रस्ताव लाए या एफआईआर दर्ज करे, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
“डरो मत किसान के लिए लड़ो” — एफआईआर की धमकी पर राहुल का पलटवार!
राहुल गांधी ने सरकार के तेवरों पर जवाब देते हुए कहा—
“एफआईआर करो, मुकदमा चलाओ या प्रिविलेज मोशन लाओ, मैं किसानों के हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटूंगा।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी वीडियो संदेश में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के जरिए किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि ऐसे समझौतों से कपास, सोयाबीन, सेब और फल उत्पादक किसानों की आजीविका पर संकट आएगा और देश की खाद्य सुरक्षा कमजोर होगी। राहुल गांधी का आरोप है कि विदेशी ताकतें लंबे समय से भारत के कृषि बाजार पर नजर गड़ाए बैठी हैं और मौजूदा सरकार ने उनके लिए रास्ते खोल दिए हैं।
✍️ दर्पण न्यूज़ 24×7 | राजनीतिक डेस्क
