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उत्तराखंड हाईकोर्ट के बड़े फैसले: पेंशन रोक आदेश पर स्टे, भूमि अधिग्रहण याचिका खारिज, दुष्कर्म आरोपी को राहत नहीं!
दर्पण न्यूज 24/7 | नैनीताल
नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को कई महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करते हुए राज्य के कर्मचारियों, भूमि अधिग्रहण और आपराधिक प्रकरण से जुड़े अहम आदेश जारी किए। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाली खंडपीठ और अन्य पीठों ने अलग-अलग मामलों में राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को निर्देश दिए।
सिंचाई और लोनिवि कर्मियों को बड़ी राहत, पेंशन रोक आदेश पर स्टे!
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) और सिंचाई विभाग के नियमित एवं वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन से बाहर करने संबंधी वित्त विभाग के 16 जनवरी 2026 के आदेश पर रोक लगा दी है।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के 2018 के ‘प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार’ फैसले के विपरीत है, जिसमें वर्कचार्ज सेवा को पेंशन के लिए मान्य माना गया था। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कर्मचारियों के पक्ष को गंभीर मानते हुए सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
इस आदेश से उन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी पेंशन बंद कर दी गई थी या जिन्हें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही थी।
बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड भूमि अधिग्रहण याचिका खारिज!
हाईकोर्ट ने देहरादून में प्रस्तावित बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया।
खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को अभी अधिग्रहण का नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोटिस मिलने पर प्रभावित व्यक्ति सक्षम प्राधिकरण के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को राहत नहीं!
नैनीताल में नाबालिग से यौन शोषण के आरोपी ठेकेदार उस्मान खान की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक कुमार महरा की पीठ ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 फरवरी 2026 की तिथि निर्धारित की है।
‘जौनसारी’ की गलत स्पेलिंग सुधारने पर सरकार से जवाब तलब!
हाईकोर्ट ने जौनसार क्षेत्र के लोगों की जाति ‘जौनसारी’ की अंग्रेजी स्पेलिंग केंद्र सरकार के गजट में गलत दर्ज होने के मामले में राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। कोर्ट ने पूछा है कि स्पेलिंग सुधारने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

न्यायालय के फैसलों का व्यापक असर!
हाईकोर्ट के इन फैसलों का राज्य के हजारों कर्मचारियों, भूमि अधिग्रहण से प्रभावित नागरिकों और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। विशेष रूप से पेंशन मामले में कोर्ट का आदेश कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

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