हॉर्मुज संकट के बीच भारत को राहत: अमेरिका ने फंसे रूसी तेल की खरीद पर 30 दिन की छूट दी!
दर्पण न्यूज 24/7 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज़रानी बाधित होने के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल कार्गो को खरीदने के लिए भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिनों की अस्थायी छूट दे दी है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह सीमित और अस्थायी व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य आपूर्ति में आई बाधा को दूर करना है। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़े चल रहे संघर्ष के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध पैदा हो गया है, जिससे तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है।
अमेरिका के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) द्वारा जारी इस छूट के तहत केवल वही रूसी तेल कार्गो भारत ला सके जाएंगे, जो पहले ही जहाज़ों के जरिए भेजे जा चुके हैं और समुद्र में फंसे हुए हैं। यह अनुमति 4 अप्रैल 2026 तक ही प्रभावी रहेगी। नई रूसी तेल खेप भेजने की अनुमति इस फैसले में शामिल नहीं है और इसे अमेरिकी प्रतिबंधों में किसी व्यापक ढील के रूप में नहीं देखा जा रहा है।
अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस अस्थायी छूट से रूस सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही वॉशिंगटन ने संकेत दिया है कि मौजूदा संकट खत्म होने के बाद भारत से अमेरिकी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है।
दरअसल, मध्य-पूर्व के प्रमुख समुद्री मार्गों में बाधा के कारण अचानक कच्चे तेल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुट गई हैं।
इसी क्रम में भारत की सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित कई कंपनियों ने इस अस्थायी छूट का फायदा उठाते हुए रूसी कच्चे तेल की कई मिलियन बैरल खेप सुरक्षित कर ली है। बताया जा रहा है कि इस तेल को मुख्य रूप से घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने वाली रिफाइनरियों में प्रोसेस किया जाएगा, जबकि निर्यात उन्मुख संयंत्रों में गैर-रूसी कच्चे तेल का उपयोग जारी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज क्षेत्र में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और ऐसे में अमेरिका की यह अस्थायी छूट भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश के लिए राहत भरा कदम है।
