उत्तराखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ गरजे विधायक मयूख महर, बोले, अब नहीं चलेगा मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़!
सोमवार को पिथौरागढ़ में देंगे धरना, कहा अस्पतालों में डॉक्टर नहीं, दवाएं नहीं, मेडिकल कॉलेज अधर में और मरीज बेहाल!
दर्पण न्यूज 24/7 पिथौरागढ़। देवभूमि उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार उठ रहे सवाल अब जनआंदोलन का रूप लेने लगे हैं। पहाड़ से लेकर मैदानी जिलों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, अस्पतालों में दवाओं का अभाव, मेडिकल कॉलेजों की धीमी रफ्तार और मरीजों को निजी अस्पतालों के भरोसे छोड़ देने के आरोपों के बीच पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक सोमवार 20 जुलाई को सुबह 11 बजे टकाना रामलीला मैदान में एक दिवसीय धरने पर बैठेंगे।
मयूख महर ने कहा कि स्वास्थ्य किसी भी नागरिक का बुनियादी अधिकार है, लेकिन उत्तराखंड में हालात ऐसे हैं कि मरीजों को समय पर इलाज तक नसीब नहीं हो रहा। जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए हल्द्वानी, देहरादून या दूसरे राज्यों के अस्पतालों की ओर भेजा जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इलाज के खर्च के बोझ तले दब रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज आज भी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो सका है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि मेडिकल कॉलेज जनता को समुचित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दे पा रहा, तो यह सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विधायक ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, सर्जन, आईसीयू के स्थायी चिकित्सक और इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर जैसे महत्वपूर्ण पद खाली हैं। तकनीशियनों और तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण जांच और उपचार व्यवस्था प्रभावित हो रही है। अस्पतालों में आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। सामान्य जांचों के लिए भी निजी लैबों का सहारा लेना पड़ रहा है।
मयूख महर ने कहा कि यह स्थिति केवल पिथौरागढ़ की नहीं, बल्कि उत्तराखंड के अनेक पर्वतीय जिलों की सच्चाई है। पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता और कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। यदि सरकार ने समय रहते स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत नहीं किया, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज को तत्काल पूर्ण रूप से संचालित किया जाए, जिला अस्पताल में सभी रिक्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए, तकनीकी स्टाफ की कमी दूर की जाए, अस्पतालों में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा मरीजों को जांच और दवाओं के लिए निजी संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े।
विधायक ने कहा कि जनता के स्वास्थ्य के साथ समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से सोमवार को टकाना रामलीला मैदान पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की इस लड़ाई में शामिल होने की अपील की।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर शुरू हो रहा यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक और जनसरोकार का मुद्दा बन सकता है। यदि प्रदेशभर में डॉक्टरों के रिक्त पद, मेडिकल कॉलेजों की स्थिति और जिला अस्पतालों की व्यवस्थाओं में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो यह आंदोलन अन्य जिलों तक भी फैल सकता है।
