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दून मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में बवाल: महिला गार्ड के सिर पर बोतल से हमला, सुरक्षाकर्मियों से मारपीट!

दर्पण न्यूज 24×7 | ब्यूरो : प्रमोद बमेटा

देहरादून। राजधानी देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की इमरजेंसी रविवार सुबह उस समय रणक्षेत्र में बदल गई, जब उपचार के लिए आई एक किशोरी के तीमारदारों और अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों के बीच हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना में एक महिला सुरक्षाकर्मी के सिर पर बोतल से हमला किए जाने और दूसरी महिला गार्ड के पेट में लात मारने का आरोप है। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

जानकारी के अनुसार, 16 वर्षीय किशोरी को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था। मेडिसिन विभाग में प्राथमिक परीक्षण के बाद उसे आगे की जांच के लिए गायनी विभाग भेजा गया, जहां चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत रक्त का नमूना लिया गया। इसी दौरान किशोरी के तीमारदारों ने आरोप लगाया कि जरूरत से अधिक रक्त निकाला गया है। इसी बात को लेकर नर्सिंग स्टाफ और तीमारदारों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

स्थिति बिगड़ती देख ड्यूटी पर तैनात महिला सुरक्षाकर्मियों ने अस्पताल के नियमों का पालन कराने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि तीमारदार जबरन अंदर घुसने लगे। देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में बदल गई। आरोप है कि एक महिला गार्ड के सिर पर बोतल से हमला किया गया, जबकि दूसरी महिला सुरक्षाकर्मी के पेट में लात मार दी गई। बीच-बचाव करने पहुंचे अन्य सुरक्षाकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की और अभद्रता की गई।

घटना की सूचना मिलते ही चीता पुलिस मौके पर पहुंची और विवाद में शामिल लोगों को पूछताछ के लिए धारा चौकी ले गई। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

घटना के बाद अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। उनका आरोप है कि अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी होने के बावजूद अधिकांश समय पुलिसकर्मी मौजूद नहीं रहते, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर रहती है और ऐसे मामलों में कर्मचारियों को खुद ही स्थिति संभालनी पड़ती है।

दून मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर. एस. बिष्ट ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों के साथ किसी भी प्रकार की मारपीट या अभद्रता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पुलिस की नियमित तैनाती सुनिश्चित करने के लिए यह मुद्दा जल्द ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के समक्ष उठाया जाएगा।

अस्पताल में हुई इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि यदि अस्पतालों में पर्याप्त सुरक्षा और पुलिस की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।

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