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नमामी गंगे के एसटीपी बने ‘प्रदूषण के कारखाने’, अलकनंदा-भागीरथी संगम पर खतरे की घंटी!
दर्पण न्यूज 24/7 | देवप्रयाग
आस्था और आध्यात्म का प्रतीक देवप्रयाग संगम आज गंभीर पर्यावरणीय संकट की चपेट में है। कभी पवित्र मानी जाने वाली अलकनंदा नदी और भागीरथी नदी के संगम पर स्थापित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) अब खुद ही प्रदूषण फैलाने के आरोपों में घिर गए हैं।
करीब 15 वर्ष पहले नमामी गंगे योजना के तहत बनाए गए इन प्लांटों का मकसद गंदे पानी को शुद्ध कर नदियों को स्वच्छ रखना था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट नजर आ रही है।
ट्रीटमेंट के नाम पर सीधे गंदगी नदी में
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, संगम क्षेत्र में एक एसटीपी अलकनंदा के किनारे और दो भागीरथी के तट पर स्थापित हैं। आरोप है कि इन प्लांटों से बिना पर्याप्त शुद्धिकरण के सीवरेज का पानी सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है।
हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए सैंपल भी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रात में ‘सीक्रेट डिस्चार्ज’ का आरोप
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि जब प्लांट ओवरफ्लो होते हैं, तो रात के अंधेरे में बिना किसी ट्रीटमेंट के सीवरेज का पानी सीधे नदी में बहा दिया जाता है।
इसके अलावा कई जगहों पर सीवरेज लाइनों में लीकेज के कारण गंदगी सीधे जलधाराओं में मिल रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक मूकदर्शक बना हुआ है।
सार्वजनिक शौचालय भी बने समस्या
सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद भट्ट ने वीडियो जारी कर पूरे मामले का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि संगम क्षेत्र में बने सार्वजनिक शौचालयों की हालत बेहद खराब है, जिससे गंदगी और बढ़ रही है।
चारधाम यात्रा से पहले बढ़ी चिंता
गौरतलब है कि जल्द ही चार धाम यात्रा शुरू होने वाली है। ऐसे में यदि संगम घाटों की यही स्थिति बनी रही, तो देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और उत्तराखंड की छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
स्थानीय लोगों की मांगें
खराब एसटीपी प्लांटों को तत्काल बंद या मुख्य प्लांट से जोड़ा जाए
संगम क्षेत्र में शौचालय, डस्टबिन और चेंजिंग रूम की बेहतर व्यवस्था हो
सीवरेज लाइनों की मरम्मत कर रिसाव पर तुरंत रोक लगे
धार्मिक स्थलों के पास सीवरेज लाइनों का सुरक्षित पुनर्स्थापन किया जाए
बड़ा सवाल
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए ये प्रोजेक्ट जब खुद ही प्रदूषण फैलाने लगे हैं, तो आखिर जिम्मेदार विभाग कब जागेगा?
आस्था के इस केंद्र को बचाने के लिए ठोस कार्रवाई कब तक होगी—यही सवाल अब हर श्रद्धालु और स्थानीय निवासी पूछ रहा है।

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