आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री तक पहुंचा प्रार्थना पत्र!
दर्पण न्यूज 24/7
हल्द्वानी/लालकुआं। क्षेत्र के समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया एवं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य गोविंद बल्लभ भट्ट ने देश में लागू आरक्षण नीति की संवैधानिक समीक्षा की मांग को लेकर बड़ा कदम उठाया है। दोनों ने तहसीलदार लालकुआं के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित प्रार्थना पत्र प्रेषित किया है। साथ ही यही पत्र रजिस्ट्री डाक से प्रधानमंत्री भारत सरकार और मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को भी भेजा गया है।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत सभी नागरिकों को समानता, भेदभाव से संरक्षण तथा सरकारी सेवाओं में समान अवसर का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव और क्रियान्वयन की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित निर्णय इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992) का हवाला देते हुए आरक्षण की सीमा और संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
समाजसेवियों ने मांग की है कि आरक्षण नीति की समयबद्ध और निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए तथा यह आकलन किया जाए कि इसका वास्तविक लाभ वंचित वर्गों तक पहुंच रहा है या नहीं। साथ ही मेरिट और समान अवसर के बीच संतुलन बनाए रखने, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों सहित सभी वर्गों को न्यायसंगत अवसर देने और इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विमर्श कराए जाने की भी मांग उठाई गई है।
पत्र में आरक्षण नीति को “यूजीसी काला कानून” बताते हुए इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग भी की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि इस विषय पर गंभीरता नहीं दिखाई गई तो जनस्तर पर विरोध की स्थिति बन सकती है।
समाजसेवियों ने स्पष्ट किया कि यह पहल पूरी तरह संवैधानिक दायरे में रहकर जनहित में की गई है, जिससे देश में समानता और न्याय की भावना मजबूत हो सके।
अब यह मुद्दा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंच चुका है। ऐसे में इस पर सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।
