लालकुआँ में ‘लंगड़े हाथी’ का कहर: 72 घंटे में तीन मौतें, जंगल जाना बना जानलेवा!
दर्पण न्यूज़ 24/7 ब्यूरो, प्रमोद बमेटा
लालकुआँ। तराई के जंगलों में इन दिनों खौफ का दूसरा नाम बन चुका एक ‘लंगड़ा हाथी’ लगातार इंसानी जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। टांडा रेंज क्षेत्र में बीते 72 घंटों के भीतर तीन लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। ताजा घटना शुक्रवार की है, जब जंगल में जलौनी लकड़ी लेने गई 76 वर्षीय मैना देवी को हाथी ने बेरहमी से कुचलकर मार डाला।
प्रत्यक्षदर्शी महिलाओं के मुताबिक, वे रोजमर्रा की तरह जंगल में लकड़ी बीन रही थीं। तभी अचानक टहनियों के टूटने की आवाज और भारी कदमों की आहट सुनाई दी। पीछे मुड़कर देखा तो एक विशालकाय, एक दांत वाला और लंगड़ाकर चलने वाला हाथी तेजी से उनकी ओर बढ़ता दिखा। “भागो-भागो” की चीख के बीच अफरा-तफरी मच गई। तीन महिलाएं झाड़ियों में छिपकर किसी तरह बच गईं, लेकिन मैना देवी की किस्मत ने साथ नहीं दिया।
हाथी ने उन्हें सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया और फिर पैरों से कुचल दिया। कुछ ही पलों में उनकी मौत हो गई। यह मंजर देख साथ की महिलाएं बदहवास हालत में कॉलोनी पहुंचीं और ग्रामीणों को सूचना दी।
तीन दिन, तीन मौतें – एक ही हाथी पर शक
ग्रामीणों का दावा है कि बीते दो दिनों में दो और लोगों की जान लेने वाला यही हाथी हो सकता है। घटनास्थल पास-पास होने और हाथी की पहचान (लंगड़ाकर चलना, एक दांत) एक जैसी होने से आशंका गहराती जा रही है। हालांकि वन विभाग ने अभी पुष्टि नहीं की है और जांच की बात कही है।
मजबूरी बनी मौत की वजह
मैना देवी अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए जंगल गई थीं। गैस की किल्लत के चलते लकड़ी बीनना उनकी मजबूरी बन चुका था। उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं, जबकि पति का पहले ही निधन हो चुका है।
वन विभाग अलर्ट, जंगल न जाने की अपील
लगातार हो रही घटनाओं के बाद वन विभाग हरकत में आ गया है। डीएफओ उमेश चंद्र तिवारी ने गश्त बढ़ाने और निगरानी टीम तैनात करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ग्रामीणों से जंगल न जाने की अपील की गई है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि जरूरतमंदों को जलौनी लकड़ी घर तक उपलब्ध कराई जाएगी।
मेटिंग सीजन में बढ़ी आक्रामकता
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी और मेटिंग सीजन के चलते हाथियों का व्यवहार इन दिनों ज्यादा आक्रामक हो जाता है। ऐसे समय में उनका इंसानों से टकराव बढ़ने की संभावना रहती है।
दूसरी घटनाएं भी बढ़ा रहीं चिंता
गूलरभोज-तिलपुरी क्षेत्र में भी हाथियों के झुंड द्वारा एक गाय को पटकने और युवकों का पीछा करने का वीडियो सामने आया है, जिसने खतरे की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
जानकारों की माने तो हाथियों के पारंपरिक मार्ग (कॉरिडोर) को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए
जंगल किनारे सेंसर व ड्रोन से निगरानी बढ़ाई जाए
ग्रामीणों को वन्यजीवों से बचाव का प्रशिक्षण दिया जाए
पीड़ित परिवारों को त्वरित मुआवजा मिले
जंगल पर निर्भरता कम करने के लिए गैस व रोजगार के विकल्प उपलब्ध कराए जाएं
लालकुआँ का यह घटनाक्रम सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि इंसान और वन्यजीवों के बढ़ते टकराव की गंभीर चेतावनी है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह ‘खौफ का सिलसिला’ और भी भयावह रूप ले सकता है।
