








सूर्य घर योजना में सब्सिडी बंद, फिर भी बड़े-बड़े दावे; जनता पूछ रही- आखिर कैसे होगा ‘ग्रीन मिशन’ सफल?
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो देहरादून। एक ओर प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में सब्सिडी बंद कर चुकी है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। सरकार ने होटल, ढाबा और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को “लो-ऑयल मेन्यू” अपनाने के लिए प्रेरित करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार की नई घोषणाएं की हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सरकार का कहना है कि किसानों को नेचुरल फार्मिंग, जीरो बजट फार्मिंग और बायो-इनपुट्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मृदा स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बिना मजबूत आर्थिक सहायता और बाजार व्यवस्था के केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों की मुश्किलें कम नहीं कर पाएंगे।
स्वच्छ ऊर्जा के नाम पर PNG कनेक्शनों को मिशन मोड में बढ़ाने और होटल, रेस्टोरेंट व सरकारी आवासों में PNG उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने का दावा किया गया, जबकि हाल ही में सब्सिडी व्यवस्था पर लगे ब्रेक ने आम लोगों की उम्मीदों को झटका दिया है।
सरकार ने गोबर गैस परियोजनाओं को भी पंचायत और ग्राम्य विकास विभागों के माध्यम से बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही माइनिंग, सोलर और पावर प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में तेजी लाने का ऐलान किया गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित हाई पावर कमेटी को 60 दिन के भीतर प्रस्तावों को मंजूरी देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हालांकि विपक्ष और आम लोग अब सरकार के इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब सोलर योजनाओं में राहत और सब्सिडी कम हो रही है, तब स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के दावे केवल कागजी साबित हो सकते हैं। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार के ये ऐलान धरातल पर कितने उतरते हैं और जनता को वास्तव में कितना फायदा मिल पाता है।
