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2022 का वीडियो वायरल कर पूर्व विधायक नवीन दुम्का को घेरने की कोशिश पर पूर्व विधायक का पलटवार — “संतुलित बयान को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण”
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | लालकुआं
सोशल मीडिया में विगत दिनों पूर्व विधायक नवीन दुम्का का वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान अप्रत्याशित रूप से टिकट कटने के उपरांत उनके द्वारा मीडिया को दिए गए वक्तव्य का एक पुराना वीडियो अचानक वायरल होने के बाद उत्तराखंड भाजपा की अंदरूनी राजनीति फिर चर्चा में आ गई है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो टीम मोहन सिंह बिष्ट समर्थक सोशल मीडिया पेजों पर तेजी से प्रसारित किया गया, जिसमें दुम्का को पार्टी विरोधी छवि में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
मामले के तूल पकड़ने के बाद नवीन दुम्का ने तीखा लेकिन संतुलित जवाब देते हुए साफ कहा कि उनका वह बयान किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं था, बल्कि तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों का सामान्य विश्लेषण था। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया के दौर में छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स को संदर्भ से काटकर वायरल करना एक प्रवृत्ति बन चुकी है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
दुम्का ने कहा,“सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल किया जा रहा है, वह किसी राजनीतिक संदर्भ में दिया गया बयान नहीं था। उस दिन मैंने बहुत संतुलित तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया था। किसी भी वरिष्ठ नेता की राजनीतिक स्थिति या जनाधार को लेकर अगर कोई सामान्य टिप्पणी की जाती है, तो उसका मतलब किसी दल विशेष के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होना नहीं होता।”
उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक जीवन में दिए गए वक्तव्यों को उनके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान समय में राजनीतिक लाभ के लिए पुराने वीडियो और बयानों को नए अर्थ देकर प्रचारित किया जाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरह 2022 के चुनावी दौर के पुराने वीडियो अब दोबारा वायरल किए जा रहे हैं, उससे यह संकेत भी मिल रहे हैं कि भाजपा के भीतर टिकट, दावेदारी और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर अंदरखाने खींचतान तेज हो चुकी है। खासतौर पर लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में सोशल मीडिया के माध्यम से नेताओं की छवि गढ़ने और बिगाड़ने की राजनीति अब खुलकर सामने आने लगी है।
नवीन दुम्का के इस बयान ने भाजपा संगठन के भीतर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि पार्टी के पुराने नेताओं को ही सोशल मीडिया ट्रोलिंग और गुटबाजी का सामना करना पड़ेगा, तो इसका असर जमीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ सकता है।
दुम्का ने बिना किसी का नाम लिए यह भी संकेत दिए कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है, लेकिन पुराने बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करना स्वस्थ राजनीति की परंपरा नहीं मानी जा सकती।
अब यह मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा संगठन के भीतर बढ़ती सोशल मीडिया आधारित गुटबाजी और आंतरिक असहजता की ओर भी इशारा कर रहा है, जिस पर पार्टी नेतृत्व को गंभीरता से विचार करना पड़ सकता है।

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