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लालकुआँ में “पैराशूट प्रत्याशी” पर सियासी संग्राम, नवीन दुम्का के बयान से भाजपा में खलबली!
दर्पण न्यूज 24/7 | ब्यूरो चीफ प्रमोद बमेटा
लालकुआँ विधानसभा में 2027 के चुनाव से पहले भाजपा के भीतर अब खुलकर “स्थानीय बनाम पैराशूट प्रत्याशी” की लड़ाई छिड़ती नजर आने लगी है। लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बाहरी चेहरों की बढ़ती दावेदारी को लेकर असंतोष पनप रहा है। इसी बीच पूर्व विधायक नवीन दुमका के तीखे बयान ने भाजपा की अंदरूनी सियासत में भूचाल ला दिया है।
पूर्व विधायक नवीन दुम्का ने बिना किसी का नाम लिए साफ संकेतों में कहा कि लालकुआँ की जनता हमेशा स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देती आई है और आज भी क्षेत्र की सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही कई लोग अचानक क्षेत्र में सक्रिय होकर खुद को स्थानीय साबित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन जनता सब समझती है।
राजनीतिक गलियारों में दुम्का का यह बयान सीधे तौर पर दीपेन्द्र कोश्यारी की बढ़ती सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से दीपेन्द्र कोश्यारी लगातार जनता के बीच पहुंच रहे हैं और भावर क्षेत्र में मकान निर्माण के बाद उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि दुम्का ने दो टूक कहा कि केवल मकान बना लेने से कोई व्यक्ति क्षेत्र का स्वाभाविक नेता नहीं बन जाता।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से पार्टी और समाज के लिए संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर पैराशूट प्रत्याशियों को आगे बढ़ाने की राजनीति कभी आसान नहीं होती। लोकतंत्र में हर किसी को दावेदारी का अधिकार है, लेकिन जनता आखिरकार उसी को स्वीकार करती है जिसने सुख-दुख में क्षेत्र के बीच रहकर संघर्ष किया हो।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का उदाहरण देते हुए दुम्का ने इशारों में कहा कि लालकुआँ की जनता पहले भी बाहरी नेतृत्व को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यह बयान आने वाले समय में भाजपा के भीतर गुटबाजी और टिकट की लड़ाई को और तेज कर सकता है।
वहीं, भगत सिंह कोश्यारी जैसे बड़े राजनीतिक चेहरे का प्रभाव क्षेत्र में आज भी कायम है। ऐसे में उनके भतीजे दीपेंद्र  कोश्यारी की सक्रियता को भाजपा के भीतर भविष्य की राजनीतिक जमीन तैयार करने के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन नवीन दुम्का के आक्रामक तेवरों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि लालकुआँ में 2027 का चुनाव केवल विपक्ष से नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर भी बड़ी सियासी जंग का मैदान बनने जा रहा है।

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