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भाजपा में ‘पैराशूट राजनीति’ पर ब्रेक, जमीनी चेहरों पर दांव
टिकट वितरण से पहले हाईकमान का बड़ा संदेश, लालकुआं में नवीन दुमका के बयान को मिली मजबूती!
दर्पण न्यूज 24/7,देहरादून। 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी रणनीति का खाका लगभग साफ कर दिया है। पार्टी इस बार चुनावी मैदान में “पैराशूट प्रत्याशियों” की बजाय स्थानीय और जमीनी नेताओं पर भरोसा जताने की तैयारी में है। टिकट वितरण के दौरान असंतोष और बगावत की संभावनाओं को रोकने के लिए भाजपा नेतृत्व अब उन्हीं चेहरों को प्राथमिकता देने जा रहा है, जिनकी अपने विधानसभा क्षेत्र में मजबूत पकड़ और लगातार सक्रियता रही है।
सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुई कोर ग्रुप की बैठकों और शीर्ष स्तर पर हुई चर्चाओं में यह साफ संकेत दिए गए हैं कि इस बार मंत्री, विधायक या बड़े नेताओं को सीट बदलने की छूट नहीं मिलेगी। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सभी जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में ही संगठन और जनता के बीच सक्रिय रहकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करें।
दरअसल पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा को कई सीटों पर “पैराशूट प्रत्याशियों” को लेकर अंदरूनी नाराजगी झेलनी पड़ी थी। कुछ नेताओं को दूसरी सीटों से मैदान में उतारा गया तो कुछ नेताओं को अंतिम समय में दूसरे दलों से लाकर टिकट दे दिया गया। इसका असर कई जगह संगठनात्मक असंतोष के रूप में सामने आया था। अब पार्टी उसी अनुभव से सबक लेकर रणनीति बदलती दिखाई दे रही है।
भाजपा के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि करीब आधा दर्जन मंत्री और विधायक दूसरी सीटों से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के स्पष्ट संकेतों ने उनकी संभावनाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया है। पार्टी का फोकस अब ऐसे स्थानीय नेताओं पर है जो वर्षों से क्षेत्र में संगठन के लिए काम कर रहे हैं और जनता के बीच उनकी सीधी पकड़ है।
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की ओर से भी जनप्रतिनिधियों और नेताओं को अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने का संदेश दिया जा चुका है। पार्टी संगठन का मानना है कि स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने से न केवल चुनावी मजबूती मिलेगी बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा।
इसी बीच लालकुआं विधानसभा में पूर्व विधायक नवीन दुमका का वह बयान भी अब राजनीतिक रूप से चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने पैराशूट प्रत्याशियों के बजाय स्थानीय और जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की बात कही थी। उस समय उनके बयान को केवल क्षेत्रीय राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब भाजपा हाईकमान के संकेतों के बाद इसे संगठन की व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जाने लगा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा का यह रुख उन नेताओं के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो लंबे समय से दूसरे क्षेत्रों में चुनावी जमीन तलाश रहे थे। वहीं स्थानीय कार्यकर्ताओं और पुराने संगठनात्मक चेहरों में इस फैसले से उत्साह का माहौल है।
स्पष्ट संकेत हैं कि भाजपा 2027 के चुनाव में “स्थानीय बनाम पैराशूट” की बहस को गंभीरता से लेते हुए संगठन आधारित चुनावी मॉडल पर आगे बढ़ना चाहती है। ऐसे में आने वाले महीनों में उत्तराखंड की राजनीति में टिकट दावेदारी को लेकर समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे सकते हैं।

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