लालकुआं विधानसभा में बढ़ता नशे का जाल बना सबसे बड़ा खतरा, पूर्व विधायक नवीन दुमका की बेबाक टिप्पणी ने खड़े किए कई गंभीर सवाल?
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं।
लालकुआं विधानसभा की प्रमुख समस्याओं को लेकर पूछे गए एक सवाल पर पूर्व विधायक द्वारा दी गई बेबाक प्रतिक्रिया अब क्षेत्र में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं में सुधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने जिस स्पष्टता के साथ अवैध नशे को क्षेत्र की सबसे गंभीर और भयावह समस्या बताया, उसने सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूर्व विधायक ने कहा कि जब वह विधायक बने थे, तब पूरे क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या पेयजल की थी। विभिन्न योजनाओं और मदों से धनराशि लाकर उस समस्या के समाधान का प्रयास किया गया। इसी दौरान केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना शुरू हुई, जिसका लाभ भी क्षेत्र को मिला। उन्होंने यह भी कहा कि आज पेयजल की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर है और बिजली जैसी समस्याओं का भी काफी हद तक समाधान हो चुका है। उनके अनुसार विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और समय के साथ समस्याओं का स्वरूप भी बदलता रहता है।
लेकिन इसके बाद उन्होंने जिस विषय को सबसे बड़ी चुनौती बताया, वह था क्षेत्र में तेजी से फैलता अवैध नशा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज लोगों की सबसे बड़ी अपेक्षा सरकार से शांति व्यवस्था और सुरक्षित सामाजिक वातावरण को लेकर होती है, लेकिन लालकुआं विधानसभा में अवैध नशे का विकेंद्रीकरण तेजी से हुआ है और स्थिति भयावह हो चुकी है। उनका यह बयान केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि यह क्षेत्र के बदलते सामाजिक माहौल की गंभीर तस्वीर भी पेश कर रहा है।
पूर्व विधायक की टिप्पणी इस ओर इशारा करती है कि नशे का कारोबार अब सीमित दायरे तक नहीं रह गया है। गांवों, कस्बों और छोटे इलाकों तक इसकी पहुंच बढ़ना सामाजिक ताने-बाने के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इसकी चपेट में युवा वर्ग तेजी से आ रहा है। बदलती जीवनशैली, बेरोजगारी और सामाजिक दबावों के बीच युवाओं का नशे की ओर झुकाव आने वाले समय में गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले सकता है।
उन्होंने यह भी माना कि पुलिस प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई करता है, लेकिन यह केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं रह गया है। यह एक सामाजिक समस्या बन चुकी है, जिससे निपटने के लिए समाज, परिवार और प्रशासन तीनों को मिलकर काम करना होगा। केवल छापेमारी या गिरफ्तारी से हालात पूरी तरह नियंत्रित नहीं किए जा सकते।
सामाजिक जानकारों का भी मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में अपराध, पारिवारिक तनाव और युवाओं के भविष्य पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। ऐसे में स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान, खेल और रोजगार के अवसर, अभिभावकों की सक्रिय भूमिका और नशा तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई जैसी पहल जरूरी मानी जा रही हैं।
पूर्व विधायक का यह बयान अब राजनीतिक चर्चा से आगे बढ़कर सामाजिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। लालकुआं विधानसभा में यदि जनप्रतिनिधि स्वयं सार्वजनिक रूप से नशे की भयावह स्थिति को स्वीकार कर रहे हैं, तो यह निश्चित रूप से प्रशासन, समाज और राजनीतिक नेतृत्व तीनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मुद्दे पर केवल बयानबाजी होती है या फिर वास्तव में कोई ठोस और प्रभावी पहल सामने आती है।
दर्पण न्यूज 24/7
“जन सरोकार की आवाज”
