








नारी शक्ति वंदन के नारों से आगे बढ़े भाजपा, विधानसभा लालकुआं से वरिष्ठ भाजपा नेत्री आनंदी गड़िया की दावेदारी लिख सकती है नया राजनीतिक इतिहास।
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं।
देश/प्रदेश की राजनीति में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी का “नारी शक्ति वंदन” अभियान सबसे अधिक चर्चित राजनीतिक विषयों में शामिल है। भारतीय जनता पार्टी इसे महिला सशक्तिकरण और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का ऐतिहासिक अभियान बताकर देशभर में आगे बढ़ा रही है। मंचों से महिलाओं को नेतृत्व देने की बातें हो रही हैं, इधर अब उत्तराखंड की लालकुआं विधानसभा से उठ रही एक महिला नेता की दावेदारी भाजपा नेतृत्व के सामने एक बड़ा और वास्तविक सवाल खड़ा कर रही है कि क्या पार्टी अपने इस संकल्प को जमीन पर उतारने का साहस दिखाएगी?
लालकुआं विधानसभा से भाजपा की वरिष्ठ कार्यकर्ता, शिक्षाविद और समाजसेवी श्रीमती आनंदी गड़िया ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। आनंदी गड़िया का नाम उन महिला नेताओं में शामिल है जिन्होंने राजनीति को केवल चुनाव तक सीमित न रखकर सामाजिक सरोकारों और संगठनात्मक संघर्ष के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है।
संस्कृत विषय में स्नातकोत्तर और बीएड की शिक्षा प्राप्त कर चुकी आनंदी गड़िया राजनीति ही नहीं बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय रही हैं। वर्तमान में वह बीबीवीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रबंध निदेशक हैं। उनके द्वारा लंबे समय से सामाजिक और शैक्षिक चेतना को मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है और उनका वास्तविक जनसंपर्क और सामाजिक संघर्ष भी गांवों से शुरू हुआ है
वर्ष 1987 में ग्राम किशनपुर सकुलिया की महिला मंगल दल अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को संगठित करने का कार्य शुरू किया। उस दौर में जब गांवों में महिलाओं की सामाजिक भागीदारी बेहद सीमित मानी जाती थी, तब आनंदी गड़िया ने महिलाओं को सामाजिक कुरीतियों, नशा उन्मूलन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर जागरूक किया। वृक्षारोपण और महिला जागरूकता अभियानों के माध्यम से उन्होंने गांव-गांव में सक्रिय भूमिका निभाई।
उनके सामाजिक कार्यों और जनसंपर्क का ही परिणाम था कि वर्ष 1995 से 2000 तक वे ग्राम किशनपुर सकुलिया की प्रधान चुनी गईं। इसके बाद वर्ष 2000 से 2006 तक लगातार दूसरी बार भी जनता ने उन पर भरोसा जताया। अपने कार्यकाल में उन्होंने ग्रामीण सड़क, पेयजल और विकास योजनाओं से जुड़े कई कार्यों को आगे बढ़ाया। महिला हितों से जुड़े विषयों पर भी उन्होंने निरंतर सक्रियता दिखाई।
भाजपा संगठन में भी आनंदी गड़िया का लंबा संघर्ष रहा है। महिला मोर्चा में जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2010 से 2012 तक भाजपा महिला मोर्चा जिला उपाध्यक्ष रहीं। इसके बाद वर्ष 2012 से 2019 तक जिला मंत्री के रूप में संगठन को मजबूत करने का कार्य किया। वर्ष 2020 से 2023 तक वे भाजपा महिला मोर्चा उत्तराखंड की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालकुआं विधानसभा में भाजपा यदि वास्तव में “नारी शक्ति वंदन” अभियान को मजबूत राजनीतिक संदेश में बदलना चाहती है तो आनंदी गड़िया जैसी जमीनी और अनुभवी महिला कार्यकर्ता को आगे बढ़ाना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण निर्णय साबित हो सकता है। क्योंकि आज महिलाएं केवल राजनीतिक मंचों की उपस्थिति नहीं, बल्कि नेतृत्व में सम्मानजनक भागीदारी चाहती हैं।
लालकुआं विधानसभा लंबे समय से स्थानीय बनाम बाहरी नेतृत्व की बहस का केंद्र रही है। और वर्तमान में भी दावेदारी को लेकर घमासान मचा हुआ है ऐसे में आनंदी गड़िया की दावेदारी स्थानीय महिला नेतृत्व को मजबूत करने वाली पहल के रूप में भी देखी जा रही है। संगठन और समाज दोनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाली महिला कार्यकर्ता को अवसर देना भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से भी बड़ा संदेश माना जा सकता है।
अब भाजपा नेतृत्व के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या “नारी शक्ति वंदन” केवल भाषणों और नारों तक सीमित रहेगा, या फिर वर्षों तक संगठन के लिए संघर्ष करने वाली महिलाओं को वास्तव में नेतृत्व का अवसर भी मिलेगा। लालकुआं से उठती आनंदी गड़िया की दावेदारी अब केवल एक राजनीतिक टिकट की मांग नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं की उम्मीद बनती जा रही है जो राजनीति में सम्मानजनक भागीदारी चाहती हैं।
