हल्दूचौड़ की बंद पड़ी दवा फैक्ट्री में फिर गूंजेगी मशीनों की आवाज!
यूएमपीएल के पुनर्जीवन पर सरकार का बड़ा दांव, रोजगार और कारोबार का नया केंद्र बनेगा हल्दूचौड़!
रानीखेत की सीडीएफ के साथ यूएमपीएल को भी मिलेगी नई जिंदगी, 100 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा
हल्दूचौड़। वर्षों से वीरान पड़ी हल्दूचौड़ की उत्तराखंड स्टेट मेडिसिन एंड पैरामेडिकल्स लिमिटेड (यूएमपीएल) फैक्ट्री एक बार फिर सुर्खियों में है। उत्तराखंड सरकार और उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) ने इस बंद पड़ी औद्योगिक इकाई को पुनर्जीवित करने का फैसला लिया है। यदि योजना धरातल पर उतरती है तो हल्दूचौड़ न केवल आयुर्वेदिक औषधि उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का नया अध्याय भी शुरू हो सकता है।
लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रही यूएमपीएल फैक्ट्री के पुनरुद्धार को लेकर सहकारिता विभाग ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। फैक्ट्री में आधुनिक मशीनें, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और गुणवत्ता आधारित उत्पादन प्रणाली स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही रानीखेत स्थित को-ऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री (सीडीएफ) को भी पुनर्जीवित किया जाएगा, लेकिन तराई क्षेत्र की दृष्टि से सबसे अधिक उम्मीदें हल्दूचौड़ की यूएमपीएल से जुड़ी हैं।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार सहकारिता आधारित औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से वर्षों से बंद पड़ी इकाइयों को दोबारा संचालित कर उन्हें आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूएमपीएल और सीडीएफ का पुनरुद्धार राज्य को आयुर्वेदिक औषधि निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।
हल्दूचौड़ में बनेंगी प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियां
योजना के अनुसार यूएमपीएल में चूर्ण, वटी, रस, भस्म, तैल, आसव-अरिष्ट, गुग्गुल तथा पाक-अवलेह जैसी पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण किया जाएगा। महाशंख वटी, आरोग्यवर्धिनी वटी, त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, अर्जुनारिष्ट, दशमूलारिष्ट, महानारायण तैल और अभ्रक भस्म जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि आधुनिक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार होने वाले इन उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार में स्थापित किया जाएगा।
युवाओं को रोजगार, किसानों को मिलेगा लाभ
फैक्ट्री के पूर्ण संचालन से 200 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। इसका सीधा लाभ हल्दूचौड़, लालकुआं, हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं को मिलेगा। वहीं औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले 500 से 1000 किसानों को भी अपनी उपज के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध होगा।
कच्चे माल की आपूर्ति, पैकेजिंग, परिवहन, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़े हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इससे तराई क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
100 करोड़ कारोबार का लक्ष्य
सरकार ने यूएमपीएल और सीडीएफ के संचालन के बाद लगभग 100 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार का लक्ष्य निर्धारित किया है। अनुमान है कि प्रतिवर्ष 10 से 15 करोड़ रुपये तक का लाभ अर्जित किया जा सकेगा। आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता मानकों के जरिए इन इकाइयों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की तैयारी की जा रही है।
वापस लौट सकती है क्षेत्र की औद्योगिक पहचान
एक समय क्षेत्र की महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई रही यूएमपीएल के बंद होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा झटका लगा था। फैक्ट्री परिसर वर्षों से खामोश पड़ा है। अब इसके पुनर्जीवन की घोषणा से लोगों में नई उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सरकार अपनी योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करती है तो हल्दूचौड़ की यह फैक्ट्री फिर से क्षेत्र की आर्थिक धुरी बन सकती है।
हालांकि यह पूरी योजना फिलहाल सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के दावों और विभागीय कार्ययोजना पर आधारित है। वर्षों से बंद पड़ी यूएमपीएल फैक्ट्री को लेकर अतीत में भी कई घोषणाएं और उम्मीदें सामने आती रही हैं, लेकिन वे धरातल पर साकार नहीं हो सकीं। ऐसे में क्षेत्र की जनता, युवा और किसान इस नई घोषणा को आशा और उत्सुकता के साथ देख रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि हल्दूचौड़ की बंद पड़ी फैक्ट्री में मशीनों की आवाज आखिर कब सुनाई देगी और सहकारिता मंत्री का यह दावा कब वास्तविकता का रूप लेगा। जब तक उत्पादन शुरू नहीं होता और रोजगार के अवसर धरातल पर दिखाई नहीं देते, तब तक यह घोषणा लोगों के लिए उम्मीदों से भरा एक वादा ही बनी रहेगी। आने वाले समय में सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की असली परीक्षा उसके क्रियान्वयन से ही होगी।
