खबरें शेयर करें -

जंगल की चौखट से चोरी हुई सुरक्षा! मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने और वन संपदा की रक्षा के लिए लगी सोलर लाइटें उखाड़ ले गए चोर, वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल!

दर्पण न्यूज 24×7 | हल्द्वानी

मानव–वन्यजीव संघर्ष पर अंकुश लगाने, वन क्षेत्र से सटे गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा बहुमूल्य वन संपदा को अवैध गतिविधियों से बचाने के उद्देश्य से तराई केंद्रीय वन प्रभाग की हल्द्वानी रेंज द्वारा लाखों रुपये की लागत से स्थापित की गई सोलर लाइटें अब चोरों के निशाने पर आ गई हैं। रविवार देर रात बमेटा बंगर केशव ग्राम सभा  के जंगल से सटे ग्राम राधा बांगर और गंगापुर कबडवाल ग्राम पंचायत के हरिपुर भानदेव की सरहद में  लगी दो सोलर लाइटें अज्ञात चोर उखाड़कर ले गए। इस घटना ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार जिन स्थानों पर ये सोलर लाइटें लगाई गई थीं, वहां लंबे समय से हाथी सहित अन्य वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। रात के समय पर्याप्त रोशनी रहने से ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन में मदद मिलती थी और जंगली जानवरों की गतिविधियों पर भी निगरानी रखना आसान होता था। लेकिन अब इन लाइटों की चोरी से उस पूरी योजना पर ही सवाल उठने लगे हैं, जिसके लिए सरकार ने लाखों रुपये खर्च किए थे।

दरअसल, इन सोलर लाइटों का उद्देश्य केवल मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करना ही नहीं था। इन्हें जंगल की सीमा पर इसलिए भी लगाया गया था ताकि बहुमूल्य वन संपदा की सुरक्षा मजबूत हो सके। रोशनी रहने से लकड़ी तस्करी, अवैध कटान, वन संपदा की चोरी और रात के समय होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके। ऐसे में इन लाइटों की चोरी केवल सरकारी संपत्ति की चोरी नहीं, बल्कि वन सुरक्षा व्यवस्था को खुली चुनौती मानी जा रही है।

घटना की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग चोरी का खुलासा करने, आरोपियों तक पहुंचने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। यदि जंगल की सीमा पर सुरक्षा के लिए लगाए गए संसाधन ही सुरक्षित नहीं रह पा रहे हैं, तो वन विभाग की निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में लोग पहले ही हाथियों और अन्य जंगली जानवरों के भय के साये में जीवन जी रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा के लिए स्थापित संसाधनों का चोरी हो जाना उनकी चिंता को और बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि यदि इस घटना का जल्द खुलासा नहीं हुआ तो असामाजिक तत्वों के हौसले और बुलंद होंगे तथा सरकारी संपत्तियां लगातार निशाने पर आती रहेंगी।

यह घटना कई गंभीर प्रश्न छोड़ रही है। आखिर जंगल की सीमा पर लगी सरकारी संपत्ति को चोर इतनी आसानी से कैसे उखाड़ ले गए? क्या उस क्षेत्र में नियमित गश्त हो रही थी? क्या वहां प्रभावी निगरानी व्यवस्था मौजूद थी? यदि थी, तो चोरी की वारदात को रोका क्यों नहीं जा सका? इन सवालों के जवाब अब वन विभाग को देने होंगे।

 

 

उत्तराखंड