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खटीमा की सुनी… अब हल्दूचौड़ की भी सुनिए मुख्यमंत्री जी!
एक ही प्रदेश, एक ही सरकार… फिर स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर दोहरा मापदंड क्यों?
हल्दूचौड़। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृह क्षेत्र खटीमा में जनभावनाओं का सम्मान करते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्थानांतरण आदेश में संशोधन कर उन्हें पुनः खटीमा में तैनात किए जाने का निर्णय निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। इससे यह संदेश गया है कि सरकार जनता की आवाज सुनती है और जनहित सर्वोपरि है।
लेकिन अब यही सवाल नैनीताल जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हल्दूचौड़ से भी उठने लगा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि खटीमा की जनता की भावनाओं का सम्मान किया जा सकता है, तो हल्दूचौड़ की जनता की पीड़ा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आखिर वे भी इसी उत्तराखंड की जनता हैं।
हल्दूचौड़ सीएचसी पहले से ही विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में स्थापित एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी आधुनिक मशीनें पर्याप्त विशेषज्ञों के अभाव में पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो पा रही हैं। ऐसे हालात में एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. सुधीर कन्याल सीमित संसाधनों के बीच लगातार हजारों मरीजों को उपचार उपलब्ध करा रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि बिना किसी समकक्ष विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति के डॉ. कन्याल का स्थानांतरण कर दिया गया तो पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो जाएगी। मरीजों को उपचार के लिए हल्द्वानी या निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ेगा, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का बोझ बढ़ेगा।
जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जिस प्रकार खटीमा में जनहित और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण आदेश में संशोधन किया गया, उसी प्रकार हल्दूचौड़ सीएचसी में भी डॉ. सुधीर कन्याल का स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए या कम से कम तब तक स्थगित रखा जाए, जब तक उनके स्थान पर समान स्तर के विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो जाती।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह किसी व्यक्ति विशेष का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा प्रश्न है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री पर टिकी हैं कि क्या खटीमा के बाद हल्दूचौड़ की जनभावनाओं का भी सम्मान होगा?

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