पॉक्सो दोषी की रिहाई के कुछ दिन बाद ही मासूम बनी शिकार, पिथौरागढ़ की घटना ने उठाए बड़े सवाल!
दर्पण न्यूज 24/7 पिथौरागढ़। पांच वर्षीय मासूम से दुष्कर्म की घटना में पुलिस ने भले ही महज आठ घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर त्वरित कार्रवाई का उदाहरण पेश किया हो, लेकिन इस मामले ने एक और गंभीर बहस छेड़ दी है। गिरफ्तार आरोपी पहले भी पॉक्सो एक्ट के मामले में दोषी ठहराया जा चुका था और हाल ही में जेल से रिहा हुआ था।
23 जून को मासूम के लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस ने चार टीमें गठित कर सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से बच्ची को सकुशल बरामद किया। मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने आरोपी होशियार सिंह को देर रात गिरफ्तार कर लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपी वर्ष 2022 में भी नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सजा काट चुका था। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि गंभीर यौन अपराध में दोषी ठहराए गए अपराधियों की रिहाई के बाद उनकी निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
यह मामला केवल एक जघन्य अपराध नहीं, बल्कि अपराधियों की पुनरावृत्ति रोकने वाली व्यवस्था की भी परीक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आदतन यौन अपराधियों पर रिहाई के बाद नियमित निगरानी, सत्यापन और जोखिम आकलन जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय रही, लेकिन यह घटना इस बात का भी संकेत है कि केवल गिरफ्तारी और सजा पर्याप्त नहीं हैं। समाज की अपेक्षा है कि ऐसी व्यवस्था विकसित हो, जिससे गंभीर अपराधों में दोषी व्यक्ति दोबारा किसी मासूम की जिंदगी से खिलवाड़ न कर सके।
