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“ये रिश्ता क्या कहलाता है…?” लालकुआं में चाचा की विरासत बनाम विधायक की उपलब्धियां, भाजपा में बढ़ेगी सियासी दिलचस्पी!
एक ओर विकास कार्यों के दम पर डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, दूसरी ओर भगत दा की राजनीतिक विरासत के सहारे दीपेंद्र कोश्यारी की सक्रियता—2027 से पहले भाजपा में नई चर्चा।
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो।
लालकुआं विधानसभा की सियासत में इन आज एक दिलचस्प तस्वीर उभर रही है। एक ओर भाजपा के मौजूदा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और विकास कार्यों के दम पर दोबारा जनता का विश्वास जीतकर लालकुआं का सिरमौर बनने की तैयारी में हैं, तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे दीपेंद्र कोश्यारी भी लंबे समय से विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
शुक्रवार को मोटाहल्दू स्थित दीपेंद्र कोश्यारी के आवास पर भगत सिंह कोश्यारी के आगमन और स्थानीय भाजपा नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है। राजनीतिक जानकार इसे केवल पारिवारिक मुलाकात नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं।
डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के समर्थकों का दावा है कि सड़क, पेयजल, शिक्षा और अन्य विकास कार्यों के आधार पर जनता का विश्वास उनके साथ है। वहीं दीपेंद्र कोश्यारी के समर्थकों का मानना है कि भगत सिंह कोश्यारी की राजनीतिक विरासत और संगठन में उनकी स्वीकार्यता भविष्य में उन्हें बड़ी भूमिका दिला सकती है। भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड की राजनीति के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और उन्हें हाल ही में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया है।
फिलहाल भाजपा की ओर से 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं हैं, लेकिन लालकुआं में यह चर्चा जरूर जोर पकड़ रही है कि पार्टी विकास के चेहरे पर दांव लगाएगी या फिर राजनीतिक विरासत और संगठनात्मक सक्रियता को प्राथमिकता देगी।
अब देखना यह होगा कि 2027 के रण में भाजपा का चेहरा कौन बनता है। तब तक लालकुआं की सियासत में एक ही सवाल गूंजता रहेगा—”ये रिश्ता क्या कहलाता है…?”

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