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प्राथमिक के शिक्षक को इंटर कॉलेज में किया अटैच
शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग के बीच विभाग के आदेश पर उठे सवाल, 30 किमी दूर भेजे गए शिक्षक!

पिथौरागढ़। सीमांत क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग के बीच शिक्षा विभाग के एक आदेश पर सवाल उठने लगे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी मुनस्यारी ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय रुमीडोला के सहायक अध्यापक कमलेश जोशी को करीब 30 किलोमीटर दूर राजकीय इंटर कॉलेज बांसबगड़ में शिक्षण एवं शैक्षिक कार्य के लिए अटैच कर दिया है। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को इंटर कॉलेज में भेजे जाने को लेकर शिक्षक संवर्ग और विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
हिमालय बचाओ संघर्ष समिति ने सोमवार को सीमांत के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मामला उठाते हुए जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजा था। समिति ने मुनस्यारी और धारचूला विकासखंडों से बिना प्रतिस्थानी किसी भी शिक्षक को कार्यमुक्त नहीं करने तथा रिक्त पदों को विकासखंड स्तर पर विशेष विज्ञप्ति जारी कर भरने की मांग की थी।
समिति की ओर से कहा गया था कि सीमांत क्षेत्र के विद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। ऐसे में किसी विद्यालय से शिक्षक को हटाकर दूसरे विद्यालय में भेजने से मूल समस्या का समाधान नहीं होगा।
एक दिन बाद जारी हुआ अटैचमेंट आदेश
समिति की ओर से मांग उठाए जाने के अगले ही दिन मंगलवार को खंड शिक्षा अधिकारी मुनस्यारी की ओर से राजकीय प्राथमिक विद्यालय रुमीडोला के सहायक अध्यापक कमलेश जोशी को राजकीय इंटर कॉलेज बांसबगड़ में अटैच करने का आदेश जारी किया गया।
करीब 30 किलोमीटर दूर किए गए इस अटैचमेंट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में शिक्षकों के अलग-अलग संवर्ग होने के कारण यह भी पूछा जा रहा है कि प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक से इंटर कॉलेज में किस स्तर और विषय का अध्यापन कराया जाएगा।
शिक्षक की कमी का समाधान अटैचमेंट नहीं : मर्तोलिया!
हिमालय बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष जगत मर्तोलिया ने विभागीय आदेश पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि समिति ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर सीमांत की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की थी। ऐसे में एक विद्यालय से शिक्षक को हटाकर दूसरे विद्यालय में अटैच करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़, मूनाकोट और कनालीछीना विकासखंडों में छात्र संख्या कम होने के बावजूद तैनात शिक्षकों का आकलन कर आवश्यकता वाले सीमांत विद्यालयों में उनकी तैनाती की जानी चाहिए।
मर्तोलिया ने कहा कि सीमांत के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति अथवा निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। एक विद्यालय से शिक्षक हटाकर दूसरे विद्यालय में भेजने की व्यवस्था का विरोध किया जाएगा।
स्थानांतरण नीति का भी उठाया मुद्दा!
मर्तोलिया ने कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुगम और दुर्गम के आधार पर होने वाले स्थानांतरण पर रोक लगाई है। ऐसे में सीमांत क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों की तैनाती की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सीमांत में लंबे समय से शिक्षकों की कमी की समस्या बनी हुई है। सरकार और शिक्षा विभाग को विद्यालयवार रिक्त पदों का आकलन कर ठोस व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
विभाग के आदेश से उठे ये सवाल!
प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को इंटर कॉलेज में अटैच किए जाने के बाद अब मुख्य रूप से तीन सवाल सामने हैं—
पहला, प्राथमिक संवर्ग के शिक्षक से इंटर कॉलेज में किस स्तर का अध्यापन कराया जाएगा?
दूसरा, जिस प्राथमिक विद्यालय से शिक्षक को हटाया गया है, वहां उनकी जगह शिक्षक की व्यवस्था कैसे होगी?
तीसरा, सीमांत क्षेत्र में शिक्षकों की वास्तविक कमी दूर करने के लिए विभाग की दीर्घकालिक योजना क्या है?
सीमांत के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। ऐसे में विभागीय स्तर पर किए जा रहे अटैचमेंट से तत्काल व्यवस्था तो बनाई जा सकती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए रिक्त पदों को भरना और विद्यालयों की आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की तैनाती करना जरूरी माना जा रहा है।