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लालकुआं में भाजपा टिकट की दावेदारी ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी !

बिष्ट-दुमका के साथ चंदोला, उमेश शर्मा, कमल मुनि और दीपेंद्र कोश्यारी के नाम चर्चा में, नारी शक्ति पर दांव हुआ तो आनंदी गड़िया भी हो सकती हैं अहम चेहरा!

लालकुआं। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच लालकुआं सीट पर भाजपा के भीतर संभावित दावेदारों की सक्रियता ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। मौजूदा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट और पूर्व विधायक नवीन दुमका के साथ संगठन तथा क्षेत्रीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय कई चेहरे अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। इनमें जग्गी बंगर जिला पंचायत सीट से दो बार जीत दर्ज कर चुके कमलेश चंदोला, भाजपा संगठन में विभिन्न दायित्व निभाने वाले राज्य आंदोलनकारी उमेश शर्मा, हिंदुत्व के मुद्दों पर सक्रिय कमल मुनि तथा पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे दीपेंद्र कोश्यारी का नाम चर्चा में है।

इन सबके बीच यदि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में नारी शक्ति को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति को भी प्राथमिकता देती है तो महिला मोर्चा से जुड़ा कोई मजबूत चेहरा समीकरणों को नई दिशा दे सकता है। इसी संदर्भ में शिक्षाविद आनंदी गड़िया का नाम भी चर्चा में आना स्वाभाविक है।

आनंदी गड़िया भाजपा महिला मोर्चा में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुकी हैं। इसके साथ ही पंचायत स्तर पर कई बार प्रधान का दायित्व संभालने का अनुभव भी उनके खाते में है। यानी संगठनात्मक अनुभव के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में काम करने का अनुभव भी उनके पास है।

यही वजह है कि यदि पार्टी नेतृत्व महिला प्रतिनिधित्व, संगठनात्मक अनुभव और जमीनी स्वीकार्यता को टिकट चयन की कसौटी में प्रमुखता देता है तो आनंदी गड़िया की दावेदारी को भी नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

मौजूदा विधायक के सामने प्रदर्शन की कसौटी!

डॉ. मोहन सिंह बिष्ट वर्तमान में लालकुआं के विधायक हैं। ऐसे में टिकट की दौड़ में उनका नाम स्वाभाविक रूप से प्रमुख दावेदारों में शामिल है। पांच साल के कार्यकाल के बाद उनके सामने क्षेत्र में अपने काम और राजनीतिक स्वीकार्यता को लेकर जनता की कसौटी होगी।

पूर्व विधायक के पास अनुभव की पूंजी!

पूर्व विधायक नवीन दुमका के पास विधानसभा और संगठन दोनों का अनुभव है। क्षेत्र की राजनीति में पुराना संपर्क और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ उनकी दावेदारी का प्रमुख आधार माना जाता है।

जमीनी कार्यकर्ताओं की दावेदारी!

कमलेश चंदोला की दावेदारी को स्थानीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। जग्गी बंगर जिला पंचायत सीट पर दो बार जीत दर्ज करने के साथ उन्होंने क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की है।

वहीं राज्य आंदोलनकारी उमेश शर्मा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। लंबे समय की सक्रियता और कार्यकर्ताओं के बीच संपर्क उनकी दावेदारी का आधार है। हिंदुत्व के मुद्दों पर सक्रिय कमल मुनि भी पार्टी के वैचारिक आधार से जुड़े संभावित चेहरों में शामिल हैं।

राजनीतिक विरासत के साथ दीपेंद्र की दावेदारी

इन सबके बीच पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे दीपेंद्र कोश्यारी की लालकुआं से दावेदारी ने राजनीतिक समीकरण को और दिलचस्प बना दिया है। वह क्षेत्र को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाने की दिशा में सक्रिय हैं।

उनके पक्ष में राजनीतिक विरासत और प्रदेश स्तर पर पहचान का आधार है, जबकि उनके सामने चुनौती स्थानीय स्तर पर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक स्वीकार्यता और संगठनात्मक पकड़ को और मजबूत करने की होगी।

टिकट की दौड़ में अब सवाल केवल पुरुष चेहरों का नहीं!

लालकुआं में भाजपा के संभावित टिकट समीकरण को यदि व्यापक नजरिए से देखा जाए तो तस्वीर केवल पुरुष दावेदारों तक सीमित नहीं दिखाई देती। नारी शक्ति को राजनीतिक भागीदारी देने की भाजपा की लगातार कोशिशों के बीच आनंदी गड़िया जैसे अनुभवी महिला चेहरे का नाम भी चर्चा में आना इस दौड़ को एक नया आयाम देता है।

उनके पास महिला मोर्चा का संगठनात्मक अनुभव, पंचायत स्तर पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में कार्य करने का अनुभव और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी सामाजिक पहचान है। ऐसे में यदि पार्टी नेतृत्व इस बार महिला प्रतिनिधित्व और जमीनी संगठनात्मक अनुभव के संयोजन को प्राथमिकता देता है तो वह संभावित विकल्पों में जगह बना सकती हैं।

अंततः लालकुआं में टिकट का फैसला कई राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर होना है। मौजूदा विधायक, पूर्व विधायक, संगठन के पुराने कार्यकर्ता, राजनीतिक विरासत वाले नए चेहरे और महिला नेतृत्व,सभी अपने-अपने आधार के साथ तस्वीर में मौजूद हैं।

यानी लालकुआं में भाजपा के सामने चुनौती सिर्फ यह तय करने की नहीं है कि कौन चुनाव जीत सकता है, बल्कि यह भी है कि 2027 की सियासी बिसात पर पार्टी किस चेहरे में अपना भविष्य देखती है।

फिलहाल दावेदारियां कई हैं और दांव अलग-अलग।
अब देखना यह है कि कमल की छांव में किसे मिलता है टिकट का भरोसा,अनुभव को, वर्तमान को, संगठन की साधना को, राजनीतिक विरासत को या फिर नारी शक्ति के महिला चेहरे को।