








मलबे में दबेगा मामला या खुलेगा ध्वस्तीकरण का राज?
एसडीएम के निरीक्षण के बाद पत्रावली तलब, यूसीएफ ने गठित की पांच सदस्यीय जांच कमेटी, खुदाई, मलबे, उपखनिज और विद्युत पोलों के निस्तारण पर उठे सवालों के जवाब तलाशेगी जांच!
लालकुआं।
हल्दूचौड़ स्थित उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) के सोयाबीन एवं वनस्पति कॉम्प्लेक्स में भवन ध्वस्तीकरण के दौरान जमीन की गहराई तक खुदाई किए जाने को लेकर उठे सवाल अब विभागीय जांच की चौखट तक पहुंच गए हैं। एसडीएम के मौके पर निरीक्षण और ध्वस्तीकरण से संबंधित पत्रावली तलब किए जाने के बाद यूसीएफ प्रबंधन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच सदस्यीय विभागीय जांच कमेटी गठित कर दी है।
प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ला ने कमेटी को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी में सोयाबीन फैक्ट्री के परियोजना अधिकारी त्रिलोचन पाठक को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि जिला प्रबंधक नैनीताल प्रेमा हर्बोला, सहायक अभियंता शुभम बिष्ट, अवर अभियंता मानवेंद्र सिंह और अकाउंटेंट दीपक तिवारी सदस्य बनाए गए हैं।
कमेटी के गठन के साथ अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ध्वस्तीकरण के नाम पर परिसर में आखिर कितनी खुदाई हुई और वहां से निकले मलबे व अन्य सामग्री का निस्तारण किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
ध्वस्तीकरण था तो जमीन कितनी खोदी गई?
मामले में सबसे बड़ा सवाल परिसर में हुई खुदाई को लेकर है। भवन गिराने के लिए आवश्यक कार्य से आगे जाकर यदि जमीन की गहराई तक खुदाई की गई तो उसकी जरूरत क्या थी? खुदाई की वास्तविक गहराई कितनी थी? इससे कितनी मात्रा में सामग्री निकली और वह सामग्री आखिर गई कहां? यही सवाल जांच की दिशा तय करेंगे।
क्षेत्र में यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि कहीं मलबे के साथ निकलने वाली मिट्टी अथवा उपखनिज सामग्री का अनधिकृत दोहन या परिवहन तो नहीं हुआ। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन यदि ऐसी कोई अनियमितता सामने आती है तो मामला केवल यूसीएफ की विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहेगा और संबंधित विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
मलबे का हिसाब और वाहनों का रिकॉर्ड बनेगा अहम कड़ी।
ध्वस्तीकरण से निकले मलबे की मात्रा और उसके निस्तारण का रिकॉर्ड जांच में बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। टेंडर की शर्तें क्या थीं, कार्यादेश में क्या प्रावधान किए गए थे, परिसर में वास्तविक रूप से कितना ध्वस्तीकरण हुआ, कितनी खुदाई हुई और कितना मलबा बाहर गया—इन तमाम सवालों के जवाब दस्तावेजों से तलाशे जाने होंगे।
यदि मलबे को परिसर से बाहर ले जाया गया है तो उसके परिवहन से जुड़े वाहनों का रिकॉर्ड भी पूरी तस्वीर साफ कर सकता है।
विद्युत पोलों का मामला भी जांच की जद में।
ध्वस्तीकरण के दौरान परिसर में मौजूद विद्युत पोलों के निस्तारण को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। शिकायत के बाद यूपीसीएल के एसडीओ और अवर अभियंता ने मौके का निरीक्षण किया था और इन पोलों को यूपीसीएल की संपत्ति नहीं होने की पुष्टि की थी।
लेकिन मामला यहीं खत्म होता नजर नहीं आ रहा। चर्चा है कि यूसीएफ की ओर से यूपीसीएल को परिसर में मौजूद विद्युत पोलों को हटाए जाने के संबंध में पत्राचार भी किया गया था। ऐसे में यह पत्राचार जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज बन सकता है।
सवाल यह है कि यदि पोल यूपीसीएल की संपत्ति नहीं थे तो उनका स्वामित्व किसके पास था? यदि वे यूसीएफ की संपत्ति थे तो क्या उनका मूल्यांकन कराया गया? क्या सक्षम स्तर से अनुमति ली गई? क्या निर्धारित नीलामी या स्क्रैप निस्तारण प्रक्रिया अपनाई गई? और यदि उन्हें बेचा गया तो उससे प्राप्त धनराशि का लेखा-जोखा कहां दर्ज है? इन सवालों का जवाब जांच में मिलना जरूरी होगा।
पत्रावली खोलेगी ध्वस्तीकरण की परतें।
एसडीएम लालकुआं रेखा कोहली के मुताबिक यूसीएफ की विभागीय जांच कमेटी गठित हो चुकी है और प्रशासन की नजर भी पूरे मामले पर बनी हुई है। प्रशासन की ओर से मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी तथा विभागीय जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट का भी अध्ययन किया जाएगा।
ऐसे में अब जांच के केंद्र में केवल यह नहीं रहेगा कि भवन कैसे गिराए गए, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ध्वस्तीकरण के दौरान जमीन की खुदाई कितनी हुई, मलबे का निस्तारण किस तरह हुआ, उपखनिज संबंधी आरोपों में कितनी सच्चाई है और विद्युत पोलों के निस्तारण की प्रक्रिया क्या रही।
टेंडर, कार्यादेश, तकनीकी शर्तें, साइट की वास्तविक स्थिति, खुदाई की गहराई, मलबे की मात्रा, परिवहन का रिकॉर्ड, यूसीएफ-यूपीसीएल का पत्राचार और स्क्रैप निस्तारण से जुड़े दस्तावेजों की निष्पक्ष पड़ताल से मामले की कई परतें खुल सकती हैं।
अब रिपोर्ट का इंतजार, किसकी जिम्मेदारी होगी तय?
जांच कमेटी गठित होने के बाद गेंद अब यूसीएफ प्रबंधन के पाले में है। सवाल यह है कि जांच महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी या मौके की वास्तविक स्थिति और रिकॉर्ड का मिलान कर जिम्मेदारी भी तय होगी?
फिलहाल आरोपों की सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन इतना जरूर है कि एसडीएम के निरीक्षण, पत्रावली तलब किए जाने और यूसीएफ की पांच सदस्यीय जांच कमेटी के गठन के बाद मामला अब सिर्फ चर्चाओं तक सीमित नहीं रहा।
अब देखना यही है कि मलबे का ढेर जांच के सवालों को दबा देता है या जांच की प्रक्रिया ध्वस्तीकरण, खुदाई, मलबे और स्क्रैप निस्तारण से जुड़े सवालों का पूरा सच सामने लाती है।
