








200 मीटर सड़क ने 2027 के दावेदारों के सामने खड़ा किया बड़ा सवाल!
आईओसी डिपो–हरिपुर बच्ची लिंक मार्ग गड्ढों में तब्दील, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि धरने पर, सियासी सक्रियता के बीच जमीनी मुद्दों पर उठे सवाल!
लालकुआं।
लालकुआं विधानसभा में 2027 की सियासी जमीन तैयार होने लगी है। मौजूदा विधायक से लेकर पूर्व विधायक और संभावित दावेदार तक अपनी-अपनी राजनीतिक सक्रियता के जरिए जनता के बीच जगह बनाने में जुटे हैं। कहीं संगठनात्मक गतिविधियां हैं, कहीं सामाजिक आयोजन और कहीं राजनीतिक बैठकों के जरिए भविष्य की दावेदारी मजबूत करने की कवायद।
लेकिन इसी चुनावी हलचल के बीच आईओसी डिपो से हरिपुर बच्ची को जोड़ने वाला महज करीब 200 मीटर का लिंक मार्ग पूरी सियासत के सामने एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है।
सड़क गड्ढों में तब्दील है और समस्या के समाधान की मांग को लेकर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि कार्तिक बमेटा धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि क्षेत्र में संचालित तीन स्टोन क्रेशरों से निकलने वाले भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क की हालत लगातार खराब हुई है। मांग है कि मार्ग का निर्माण कराया जाए और यदि जांच में भारी वाहनों से सड़क को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है तो संबंधित क्रेशर संचालकों की जिम्मेदारी तय की जाए।
मामला भले ही 200 मीटर सड़क का हो, लेकिन सवाल इससे कहीं बड़ा है।
जब दर्जनों पंचायतों और ग्रामीण आबादी के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग की बदहाली को लेकर पंचायत प्रतिनिधि को धरने पर बैठना पड़े, तो फिर सत्ता के साथ-साथ 2027 की दावेदारी कर रहे राजनीतिक चेहरों की जमीनी सक्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लालकुआं की सियासत में संभावित दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। मौजूदा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के अलावा पूर्व विधायक नवीन दुमका, उमेश शर्मा, दो बार जिला पंचायत का प्रतिनिधित्व कर चुके कमलेश चंदोला, हिंदूवादी नेता कमल मुनि और भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री दीपेंद्र कोश्यारी समेत कई नाम संभावित दावेदारी को लेकर राजनीतिक चर्चाओं में हैं।
ऐसे में जनता के सामने अब एक सीधा सवाल है—दावेदारी आखिर किस आधार पर होगी?
क्या जनता के बीच सक्रियता का अर्थ केवल राजनीतिक आयोजनों, बैठकों और कार्यक्रमों में मौजूदगी तक सीमित रहेगा? या फिर गांव की सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की समस्याओं को समाधान तक पहुंचाना भी राजनीतिक सक्रियता का पैमाना बनेगा?
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सड़क की बदहाली के लिए किसी राजनीतिक व्यक्ति को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने का फिलहाल कोई आधार नहीं है। सड़क किस विभाग के अधीन है, इसके निर्माण की जिम्मेदारी किसकी है और भारी वाहनों से सड़क को नुकसान पहुंचा है या नहीं—इन सभी सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच से ही सामने आएगा।
लेकिन एक सवाल फिर भी अपनी जगह कायम है—जब समस्या सामने थी तो समाधान के लिए धरने की नौबत क्यों आई?
यही सवाल मौजूदा सत्ता के साथ-साथ 2027 की दावेदारी कर रहे चेहरों से भी है।
दरअसल, राजनीति में बड़े विकास कार्यों के दावे और भविष्य की बड़ी योजनाओं का खाका जनता को आकर्षित जरूर करता है, लेकिन जमीनी हकीकत का सामना अक्सर ऐसे ही छोटे मुद्दों पर होता है। ग्रामीण के लिए उसके घर तक पहुंचने वाली सड़क किसी बड़े प्रोजेक्ट से कम महत्वपूर्ण नहीं होती। बरसात में गड्ढों में तब्दील सड़क पर चलना, बच्चों और बुजुर्गों का आवागमन और रोजमर्रा की परेशानियां उसके लिए विकास का वास्तविक पैमाना होती हैं।
यही वजह है कि आईओसी डिपो–हरिपुर बच्ची मार्ग का यह मामला अब सिर्फ सड़क का मामला नहीं रह गया है। यह लालकुआं की राजनीतिक कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।
यदि सड़क वास्तव में क्रेशरों के भारी वाहनों से क्षतिग्रस्त हुई है तो जांच होनी चाहिए। यदि सड़क निर्माण किसी विभाग की जिम्मेदारी है तो उस विभाग को जवाब देना चाहिए। और यदि समस्या लंबे समय से ग्रामीणों के सामने है तो उसके समाधान के लिए जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका भी जनता के सामने स्पष्ट होनी चाहिए।
क्योंकि जनता को चुनाव के समय सिर्फ दावेदार नहीं चाहिए, उसे अपने बीच खड़ा होने वाला प्रतिनिधि चाहिए।
लालकुआं में 2027 की सियासी दौड़ जैसे-जैसे तेज होगी, ऐसे जमीनी मुद्दे राजनीतिक चेहरों की परीक्षा लेते रहेंगे। कौन सिर्फ मंच पर दिखाई देता है और कौन समस्या के बीच पहुंचकर समाधान की पहल करता है—इसका फैसला अंततः जनता ही करेगी।
फिलहाल 200 मीटर की यह सड़क गड्ढों में है, पंचायत प्रतिनिधि धरने पर है और प्रशासन के सामने समाधान की चुनौती है।
लेकिन इस छोटी सी सड़क ने 2027 के दावेदारों के सामने बड़ा सवाल जरूर रख दिया है—जनता का प्रतिनिधि बनने की दावेदारी चुनावी मौसम में दिखाई देने से साबित होगी या जनता की छोटी-छोटी परेशानियों के बीच खड़े होकर?
क्योंकि सड़क भले 200 मीटर की हो, लेकिन इससे उठता सवाल पूरे लालकुआं की सियासत की दिशा और दावेदारी की कार्यप्रणाली तक जाता है।
