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 मतपेटियों में बंद है दो सियासी ताकतों की अग्निपरीक्षा!
बेहड़ का दावा था 5 हजार से जीत का, शुक्ला के लिए सीट बचाना बना सवाल… सत्ता की निगाह भी किच्छा पर, नतीजे से खुलेंगे कई सियासी पत्ते!
दर्पण न्यूज 24/7 | किच्छा
किच्छा नगर पालिका का चुनाव इस बार महज चेयरमैन चुनने की कवायद नहीं था। यहां मतदाता एक चेयरमैन चुन रहे थे, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस चुनाव का अर्थ इससे कहीं बड़ा निकाला जा रहा था। मैदान में भले कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी थे, लेकिन चुनाव की असली चर्चा विधायक तिलक राज बेहड़ बनाम पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के रूप में होती रही।
दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रत्याशी की जीत के लिए पूरी ताकत झोंकी। यही वजह रही कि चुनाव के अंतिम दौर में स्ट्रांग रूम तक पहुंचा टकराव भी महज स्थानीय विवाद नहीं दिखाई दिया, बल्कि उसके पीछे जमा राजनीतिक तनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। दोनों नेताओं के बीच आमना-सामना और उसके बाद हुई धक्का-मुक्की की घटनाओं की पुष्टि विभिन्न रिपोर्टों में हुई है।
एक तरफ जीत का बड़ा दावा, दूसरी तरफ सीट बचाने की चुनौती!
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस खेमे में आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था। कांग्रेस की ओर से करीब पांच हजार मतों के अंतर से जीत का दावा किया जा रहा था। दूसरी ओर भाजपा खेमे ने भी अपने प्रत्याशी की मजबूती और संगठनात्मक ताकत के आधार पर जीत का भरोसा जताया।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में भी कांग्रेस को बढ़त मिलने की बातें होती रहीं। हालांकि यह जनचर्चा कोई आधिकारिक चुनावी आकलन नहीं है और वास्तविक तस्वीर मतगणना के बाद ही सामने आएगी।
यही वह बिंदु था जिसने किच्छा के चुनाव को सामान्य निकाय चुनाव से आगे बढ़ाकर प्रतिष्ठा और राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा बना दिया।
सत्ता की नजर किच्छा पर क्यों?
सूत्रों के मुताबिक सत्ता के शीर्ष स्तर पर भी किच्छा सीट को लेकर विशेष दिलचस्पी थी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्तर से इस सीट को हर हाल में जीतने की रणनीतिक इच्छा बताई जा रही थी। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
लेकिन राजनीतिक समीकरण को देखें तो किच्छा का महत्व केवल नगर पालिका तक सीमित नहीं है। विधानसभा राजनीति के लिहाज से यह क्षेत्र पहले से ही महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में स्थानीय निकाय का परिणाम दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों के लिए संगठनात्मक ताकत और जनाधार का एक संकेत माना जा सकता है।
बेहड़ के सामने अपना प्रभाव साबित करने की चुनौती!
विधायक तिलक राज बेहड़ के लिए यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी के साथ उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगाया था। चुनाव से पहले बेहड़ ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस की जीत का दावा किया था और निष्पक्ष मतदान एवं मतगणना को लेकर प्रशासन के सामने सवाल भी उठाए थे।
ऐसे में यदि कांग्रेस का प्रत्याशी मजबूत अंतर से जीतता है तो इसे बेहड़ के स्थानीय राजनीतिक प्रभाव के संदर्भ में पढ़ा जाएगा। वहीं अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने पर राजनीतिक विश्लेषण का एक नया दौर शुरू होना स्वाभाविक है।
शुक्ला के लिए भी कम नहीं थी चुनौती!
दूसरी ओर पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के लिए यह चुनाव भाजपा के प्रत्याशी की जीत से कहीं अधिक मायने रखता था। शुक्ला स्वयं मैदान में नहीं थे, लेकिन प्रत्याशी को जिताने की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक प्रभाव से जोड़कर देखी जा रही थी।
भाजपा ने विकास और “ट्रिपल इंजन” को प्रमुख मुद्दा बनाया, जबकि शुक्ला ने कांग्रेस के पिछले पालिका कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन मांगा था।
और फिर स्ट्रांग रूम ने खोल दिया राजनीतिक तापमान
मतदान खत्म होने के बाद स्ट्रांग रूम के बाहर दोनों नेताओं का आमना-सामना और उसके बाद हुआ विवाद इस चुनाव की पूरी कहानी को एक अलग मोड़ दे गया। सुरक्षा व्यवस्था और मतपेटियों पर पर्दे को लेकर शुरू हुआ विवाद धक्का-मुक्की और बेहड़ को थप्पड़ मारे जाने के आरोप तक पहुंच गया। पुलिस ने बाद में दोनों पक्षों के लोगों को हिरासत में लिया और थप्पड़ मारने के आरोप में धीरज कुमार के खिलाफ कार्रवाई की।
यानी जिस चुनाव में वोटों के अंतर को लेकर दावे किए जा रहे थे, उसी चुनाव के अंतिम पड़ाव पर राजनीतिक टकराव ने चुनावी गणित को सियासी सवाल में बदल दिया।
अब असली परीक्षा मतगणना की
किच्छा के मतदाताओं ने अपना फैसला मतपेटियों में बंद कर दिया है। अब सवाल यह नहीं है कि प्रचार में किसने कितने दावे किए।
सवाल यह है—
क्या कांग्रेस का पांच हजार से जीत का दावा मतपेटियों से बाहर निकलेगा?
क्या भाजपा किच्छा में अपनी राजनीतिक पकड़ का संदेश देने में सफल होगी?
और सबसे अहम—
मतपेटियों का फैसला बेहड़ और शुक्ला, दोनों की स्थानीय राजनीतिक जमीन के बारे में क्या संकेत देगा?
इन सवालों का जवाब अब भाषणों, दावों और आरोपों से नहीं, बल्कि मतगणना की मेज पर खुलने वाली एक-एक मतपेटी से मिलेगा।
किच्छा में चुनाव खत्म हो चुका है, लेकिन इसकी सियासी कहानी अभी बाकी है।

कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की प्रतिक्रिया

गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल किच्छा पहुंचे और विधायक तिलक राज बेहड़ से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की गई।

यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी किच्छा पहुंचकर विधायक बेहड़ से मुलाकात की और घटनाक्रम की जानकारी ली। कांग्रेस की ओर से स्ट्रांग रूम के बाहर हुई घटना तथा चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए।

बेहड़ का रुख

विधायक तिलक राज बेहड़ की ओर से मामले में पुलिस को अलग से औपचारिक तहरीर देने के बजाय प्रकरण को विधानसभा की विशेषाधिकार हनन समिति के समक्ष उठाने की बात कही गई है।

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