

बगैर तथ्यों के संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उचित नहीं : गजराज बिष्ट!
एसआईआर विवाद पर मेयर का कांग्रेस-विपक्ष पर पलटवार, बोले—आयोग के फैसलों पर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों की पड़ताल करे विपक्ष!
हल्द्वानी। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस और विपक्ष के आरोपों पर हल्द्वानी नगर निगम के मेयर गजराज सिंह बिष्ट ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि बगैर तथ्यों की पड़ताल किए संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। राजनीतिक दलों को आरोप लगाने से पहले तथ्यों को सामने रखना चाहिए।
नगर निगम कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए मेयर बिष्ट ने कहा कि 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग की पूर्ण बैठक और उसके बाद जारी संयुक्त वक्तव्य ने एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे कई सवालों पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। आयोग के अनुसार 24 जून 2025 के मूल एसआईआर आदेश से लेकर बाद की समय-सारणी तक संबंधित निर्णय पूरे आयोग की सहमति से लिए गए थे।
मेयर ने कहा कि आयोग के भीतर मतभेद होने का दावा भी उसके संयुक्त स्पष्टीकरण के बाद सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस अपनी जगह है, लेकिन उसके आधार पर निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर सीधे सवाल उठाना अलग विषय है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला!
गजराज बिष्ट ने कहा कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में एसआईआर को चुनौती देने वाले मामले में आयोग की एसआईआर कराने की शक्ति और प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक सार के अनुसार अदालत ने एसआईआर की वैधानिकता से जुड़े सवालों पर आयोग के अधिकार और प्रक्रिया की समीक्षा की थी।
उन्होंने कहा कि ऐसे में एसआईआर को लेकर राजनीतिक आपत्तियां दर्ज कराना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाने से पहले ठोस तथ्य सामने रखना भी उतना ही जरूरी है।
कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे पत्र पर भी उठाए सवाल!
मेयर ने निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए पत्र को एसआईआर से जोड़कर पेश किए जाने पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि आयोग के 26 सितंबर के स्पष्टीकरण के मुताबिक यह मामला किसी नीतिगत निर्णय या एसआईआर से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की कार्यप्रणाली से जुड़े आंतरिक प्रशासनिक विषय से संबंधित था।
उनका कहना था कि ऐसे प्रशासनिक विषय को एसआईआर विवाद से जोड़कर राजनीतिक रंग देना तथ्यों को अलग संदर्भ में पेश करने जैसा है।
फॉर्म-6 पर भी विपक्ष को घेरा!
बिष्ट ने एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 और उससे जुड़े घोषणा-पत्र को लेकर उठाए गए सवालों पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि एसआईआर की अवधि से अलग मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया में पुराने फॉर्म-6 का प्रावधान जारी है। आयोग ने भी 26 सितंबर के वक्तव्य में एसआईआर अवधि के बाहर पुराने फॉर्म-6 के इस्तेमाल को स्पष्ट किया है।
मेयर ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर यदि किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के पास कोई ठोस आपत्ति है तो उसे तथ्य और दस्तावेजों के साथ सामने रखना चाहिए, न कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सामान्य आरोप लगाए जाने चाहिए।
ईवीएम से राफेल तक राहुल गांधी के पुराने बयानों का किया जिक्र!
मेयर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए ईवीएम, निर्वाचन आयोग और राफेल मामले से जुड़े उनके आरोपों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के लिए सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाते समय तथ्यों और प्रमाणों की कसौटी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
बिष्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के बीच भ्रम पैदा करने के बजाय तथ्य सामने रखने चाहिए। संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर सवाल हो सकते हैं, लेकिन सवाल तथ्य और प्रमाण के आधार पर ही होने चाहिए।
