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विकासखंड परिसर में स्मारक बदहाल, तो गांवों के विकास की उम्मीद कैसे?

स्वतंत्रता सेनानियों की निशानी पर न सफाई, न रोशनी, न संरक्षण; व्यवस्था पर उठे सवाल!

दर्पण न्यूज 24/7| बाजपुर।

देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियां बाजपुर में सरकारी अनदेखी का शिकार हैं। विकासखंड कार्यालय परिसर में स्थित सेनानी स्मारक गंदगी और अव्यवस्था के बीच अपनी बदहाली बयां कर रहा है। न नियमित सफाई, न रोशनी और न ही संरक्षण की पुख्ता व्यवस्था। हैरानी यह है कि जिस परिसर से गांवों के विकास की योजनाएं संचालित होती हैं, वहीं ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

26 जनवरी 1975 को हुई थी स्थापना।

संविधान के 25 वर्ष पूरे होने पर 26 जनवरी 1975 को स्थापित इस स्मारक पर बाजपुर और आसपास के क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के नाम अंकित हैं। पहले पुराने विकासखंड भवन के मुख्य द्वार पर स्थापित स्मारक को नए भवन के निर्माण के बाद नए परिसर में स्थानांतरित किया गया था। उद्देश्य सेनानियों की स्मृतियों को सुरक्षित रखना और नई पीढ़ी को उनके बलिदान से परिचित कराना था, लेकिन मौजूदा स्थिति इस उद्देश्य पर सवाल खड़े करती है।

जब परिसर में ही बदहाली, तो गांवों का क्या हाल?

विकासखंड कार्यालय ग्रामीण विकास योजनाओं के संचालन और निगरानी की महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे में परिसर में स्थित स्मारक की अनदेखी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। हालांकि, केवल स्मारक की स्थिति से पूरे ग्रामीण विकास का आकलन नहीं किया जा सकता, लेकिन यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि सार्वजनिक धरोहरों की देखरेख को प्राथमिकता क्यों नहीं मिल रही।

राष्ट्रीय पर्वों पर शहीदों को याद करना पर्याप्त नहीं, उनकी स्मृतियों को पूरे साल सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि स्मारक की नियमित सफाई, रोशनी और संरक्षण की व्यवस्था की जाए। साथ ही इसके इतिहास और सेनानियों के योगदान की जानकारी देने वाला सूचना पट लगाया जाए।

अब सवाल संबंधित अधिकारियों से है कि स्मारक की देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है और इसकी बदहाली दूर करने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे? जब विकासखंड परिसर में ही व्यवस्था दुरुस्त रखने की जरूरत महसूस हो रही है, तो गांवों के विकास के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है। विकास की असली पहचान योजनाओं के आंकड़ों से नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों के धरातल पर निभाए जाने से होती है।

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