

रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर चौथी बार ब्रेक, 100 एमबीबीएस सीटों का सपना अधर में!
सरकार के दावों और एनएमसी की मंजूरी के बीच फंसा मेडिकल कॉलेज; छात्रों की बढ़ी चिंता, अगली काउंसिलिंग से पहले फिर कोशिश का भरोसा!
दर्पण न्यूज 24/7 | रुद्रपुर
उत्तराखंड को मेडिकल एजुकेशन हब बनाने के सरकारी दावों के बीच रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की मान्यता का मामला एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पंडित रामसुमेर शुक्ला राजकीय मेडिकल कॉलेज को लगातार चौथी बार नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से मंजूरी नहीं मिलने के बाद 100 एमबीबीएस सीटों पर इसी सत्र से पढ़ाई शुरू कराने की उम्मीदों को झटका लगा है। बार-बार की कवायद के बावजूद मान्यता का रास्ता साफ नहीं होने से छात्रों की चिंता बढ़ गई है। सवाल यह है कि जब कॉलेज तैयार होने और सुविधाएं विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं, तो नियामक की मंजूरी आखिर क्यों अटकी हुई है?
चार प्रयास, फिर भी मंजूरी नहीं
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कॉलेज को मान्यता दिलाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए। शुरुआती निरीक्षण में फैकल्टी की कमी, प्रोफेसर के रिक्त पदों और हॉस्टल, क्रिटिकल केयर ब्लॉक तथा स्टाफ क्वार्टर के अधूरे निर्माण जैसी कमियां सामने आई थीं। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से कमियां दूर करने का दावा किया गया और कॉलेज ने अनुपालन रिपोर्ट भी भेजी। इसके बावजूद एनएमसी की आपत्तियां दूर नहीं हो सकीं।
सितंबर के प्रथम सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट भेजे जाने के बाद भी कॉलेज को राहत नहीं मिली। इसी दौरान पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज को 50 सीटों की सशर्त मान्यता मिलने की खबर ने रुद्रपुर की उम्मीदें और बढ़ा दी थीं, लेकिन यहां मंजूरी का इंतजार खत्म नहीं हुआ। क्षेत्रीय विधायक शिव अरोरा के प्रयासों के बीच 25 सितंबर को दिल्ली में हुई सुनवाई के बाद भी कॉलेज को हरी झंडी नहीं मिली।
सरकारी दावों के सामने मान्यता की चुनौती
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लक्ष्य को अपनी प्राथमिकताओं में गिना रही है। सरकार का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और हरिद्वार में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू हुए हैं। रुद्रपुर कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटें शुरू होने से राज्य में सरकारी मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
लेकिन रुद्रपुर का मामला बताता है कि भवन और बुनियादी ढांचे का तैयार होना ही मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू कराने के लिए पर्याप्त नहीं है। फैकल्टी, जरूरी सुविधाओं और एनएमसी के निर्धारित मानकों पर खरा उतरना भी अनिवार्य है। ऐसे में मान्यता में लगातार हो रही देरी विभागीय तैयारियों और कमियों को दूर करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है।
छात्रों के भविष्य पर टिकी निगाहें
मान्यता का मामला लंबा खिंचने से उन विद्यार्थियों की चिंता स्वाभाविक है, जो रुद्रपुर में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, अगली काउंसिलिंग से पहले एक और प्रयास किया जा रहा है।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने कहा कि इस बार पूरी तैयारी के साथ अपना पक्ष रखा गया था। उनके अनुसार, जिन कॉलेजों की सुनवाई हुई, उनमें अभी किसी को अंतिम मान्यता नहीं मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली काउंसिलिंग से पहले एक और प्रयास के जरिए मंजूरी मिल सकती है।
सवाल अब सिर्फ 100 सीटों का नहीं
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की 100 सीटें केवल प्रवेश संख्या बढ़ाने का मामला नहीं हैं। इससे स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा का अवसर मिलने और क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद जुड़ी है। लेकिन लगातार चौथी बार मंजूरी नहीं मिलने के बाद केवल आश्वासन से स्थिति नहीं बदलेगी। जरूरत इस बात की है कि एनएमसी की आपत्तियों का स्पष्ट समाधान हो, आवश्यक संसाधन सुनिश्चित किए जाएं और मान्यता की वास्तविक स्थिति सामने रखी जाए।
उत्तराखंड को चिकित्सा शिक्षा का केंद्र बनाने का लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब घोषणाओं के साथ संस्थान निर्धारित मानकों पर भी खरे उतरें। फिलहाल रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की 100 सीटों पर पढ़ाई शुरू होने का सपना अगली कोशिश और एनएमसी की मंजूरी के बीच अटका है।
