पत्नी कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की एफआईआर रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंचे पप्पू गिरधारी को लगा झटका, याचिका हुई खारिज!
22 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते की दलील भी नहीं आई काम, हाईकोर्ट ने कहा—मामला महज घरेलू विवाद नहीं, मारपीट, फर्जी दस्तावेज और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोपों की जांच जरूरी!
नैनीताल। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच चल रहे विवाद में नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पत्नी रेखा आर्य की ओर से दर्ज एफआईआर को निरस्त कराने की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंचे पप्पू गिरधारी को राहत नहीं मिली। न्यायमूर्ति आलोक महरा की अदालत ने उनकी रिट याचिका खारिज करते हुए एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया।
दरअसल, रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आईपीसी की धारा 120-बी, 323, 420, 467, 468, 471, 495, 498-ए, 504 और 506 के साथ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1) के तहत आरोप शामिल हैं।
22 साल की शादी का दिया हवाला, बताया घरेलू विवाद!
हाईकोर्ट में याची पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि दोनों का विवाह 6 जुलाई 2004 को हुआ था और वे करीब 22 वर्षों से साथ रह रहे हैं। ऐसे में यह मामला मूल रूप से वैवाहिक और घरेलू विवाद का है, जिसे अनावश्यक रूप से आपराधिक रंग दिया जा रहा है। इसी आधार पर एफआईआर निरस्त करने की मांग की गई।
शादी से पहले पहली पत्नी और बच्चों की बात छिपाने का आरोप!
वहीं, रेखा आर्य की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शादी के समय गिरधारी साहू ने अपनी पहली शादी और बच्चों की जानकारी छिपाई थी। इसके अलावा अन्य महिलाओं से कथित संबंधों का विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक अपमानजनक टिप्पणियां करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायत में यह भी आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज तैयार कर रेखा आर्य को कंपनी के निदेशक पद से जबरन सेवानिवृत्त दिखा दिया गया, जबकि उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया था। इतना ही नहीं, एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए रास्ते से हटाने और हत्या की साजिश रचने से जुड़ी बातचीत का भी आरोप लगाया गया है।
कोर्ट की टिप्पणी ने बढ़ाई मुश्किलें!
राज्य सरकार और रेखा आर्य की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने याचिका का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता और जांच में सहयोग नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि मामला केवल सामान्य वैवाहिक मनमुटाव तक सीमित नहीं है। इसमें प्रथम दृष्टया शारीरिक प्रताड़ना, दस्तावेजों की कूटरचना, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर संज्ञेय अपराधों के आरोप शामिल हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल 22 वर्षों का वैवाहिक रिश्ता होने से बाद में कथित रूप से हुए अपराधों या क्रूरता की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों की वास्तविकता जांच और विचारण का विषय है।
मिनी ट्रायल नहीं कर सकती अदालत!
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के भजनलाल और निहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर मामलों में निर्धारित कानूनी सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर निरस्त करने की सुनवाई के दौरान अदालत मिनी ट्रायल नहीं कर सकती। आरोपों की सच्चाई का परीक्षण इस स्तर पर संभव नहीं है।
इन्हीं टिप्पणियों और कानूनी आधारों के साथ अदालत ने पप्पू गिरधारी की याचिका खारिज कर दी। फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले से रेखा आर्य की ओर से दर्ज एफआईआर निरस्त कराने की उनकी कोशिश को बड़ा झटका लगा है। हालांकि, एफआईआर खारिज न होने का अर्थ आरोपों का सिद्ध होना नहीं है। मामले में आरोपों की सत्यता जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी।
दर्पण न्यूज 24/7 | नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ी खबर

