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परमिट खत्म, व्यवस्था भी खत्म! नवोदय के 300 बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे
आठ अगस्त 2024 को खत्म हुआ सरकारी वाहन का परमिट, दो साल बाद भी नहीं मिला नया वाहन; बीमार बच्चों को अस्पताल पहुंचाना बना चुनौती
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो |
भिकियासैंण।
सरकारी दावों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और बच्चों को सुरक्षित माहौल देने की तस्वीर भले ही कितनी चमकदार दिखाई जाए, लेकिन भिकियासैंण विकासखंड के राजीव गांधी नवोदय विद्यालय चौनलिया की हकीकत इन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। यहां करीब 300 छात्र-छात्राएं आवासीय व्यवस्था में पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन जरूरत की घड़ी में उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए विद्यालय के पास अपना सरकारी वाहन तक नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आठ अगस्त 2024 को वाहन का परमिट खत्म होने के बाद अब तक नई व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी?
विद्यालय का सरकारी वाहन परमिट समाप्त होने के बाद अनुपयोगी हो गया। वाहन से संबंधित दस्तावेज आईटीओ कार्यालय में जमा करा दिए गए, लेकिन इसके बाद नया वाहन उपलब्ध कराने की दिशा में क्या कदम उठाए गए, यह सवाल आज भी जवाब मांग रहा है। हैरानी की बात यह है कि विद्यालय में वाहन चालक की नियुक्ति है, लेकिन वाहन के अभाव में चालक की सेवाएं भी प्रभावी रूप से उपयोग नहीं हो पा रही हैं।
विद्यालय सूत्रों के अनुसार प्रतिदिन लगभग 20 से 30 विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भतरौंजखान अथवा भिकियासैंण ले जाने की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में यदि किसी बच्चे की तबीयत अचानक गंभीर हो जाए तो उसे समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए तत्काल निजी साधन या अन्य व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है। पहाड़ी क्षेत्र में दूरी, मौसम और यातायात की परिस्थितियों को देखते हुए यह स्थिति किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है।
यह मामला केवल एक सरकारी वाहन के खराब होने या परमिट खत्म होने तक सीमित नहीं है। सवाल उन बच्चों की सुरक्षा का है जो अपने घरों से दूर आवासीय विद्यालय में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय इसलिए भेजते हैं कि वहां पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित होगी। लेकिन जब आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचाने तक की स्थायी व्यवस्था नहीं है तो अभिभावकों की चिंता स्वाभाविक है।
विद्यालय में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का मामला पहले भी सामने आ चुका है। अगस्त 2024 में चिकनपॉक्स संक्रमण फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम को विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों की जांच करनी पड़ी थी और 10 छात्रों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उस घटना के बाद भी विद्यालय की स्थायी परिवहन व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकी। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि भविष्य में कोई गंभीर स्वास्थ्य आपातस्थिति पैदा होती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी और बच्चों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था कौन करेगा?
विडंबना यह भी है कि जिस विद्यालय में सैकड़ों बच्चे चौबीसों घंटे आवासीय व्यवस्था में रहते हैं, वहां परिवहन व्यवस्था को सामान्य प्रशासनिक आवश्यकता की तरह देखा जा रहा है, जबकि यह सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। विद्यालय प्रबंधन, स्टाफ और अभिभावकों की ओर से शिक्षा विभाग से नया सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों के साथ विद्यालय के अन्य जरूरी कार्य भी सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
अब निगाहें शिक्षा विभाग और शासन पर हैं। क्या करीब 300 बच्चों वाले आवासीय विद्यालय को दो साल से अधिक समय तक बिना सरकारी वाहन के चलाना ही व्यवस्था की मजबूरी है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों ने इस समस्या को गंभीरता से लिया ही नहीं? सरकारी योजनाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली व्यवस्था के सामने चौनलिया नवोदय विद्यालय का यह मामला एक आईना है।
जरूरत अब आश्वासन की नहीं, कार्रवाई की है। सवाल सिर्फ यह नहीं कि नया वाहन कब मिलेगा, बल्कि यह भी है कि अगर आज किसी बच्चे की हालत अचानक गंभीर हो जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी आखिर कौन उठाएगा?

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