खबरें शेयर करें -

हल्द्वानी में ‘निर्वाण’ नशा मुक्ति केंद्र पर प्रशासन का बड़ा एक्शन ! औचक छापे में खुला अवैध खेल, लाइसेंस निरस्तीकरण के आदेश!
दर्पण न्यूज 24/7 हल्द्वानी।
कुमाऊँ आयुक्त/सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने हीरानगर स्थित ‘निर्वाण’ नशा उन्मूलन एवं पुनर्वास केंद्र पर औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी। निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर आयुक्त ने मौके पर ही अपर मुख्य चिकित्साधिकारी को केंद्र का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि केंद्र में गाइडलाइन के विपरीत ऐसे मरीजों को भर्ती किया गया, जो नशे के आदी नहीं थे, बल्कि अन्य बीमारियों से ग्रसित थे। इसके साथ ही बिना अनुमति महिला मरीजों को भी भर्ती किया गया, जबकि केंद्र को केवल पुरुषों के उपचार की स्वीकृति प्राप्त है। इसे गंभीर उल्लंघन मानते हुए आयुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई।
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार केंद्र को 30 मरीजों के निःशुल्क उपचार की अनुमति है, लेकिन पंजिका में इससे अधिक मरीजों के उपचार दर्ज मिले। कई मरीजों के नाम उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज ही नहीं थे। चौंकाने वाली बात यह रही कि केंद्र सरकार द्वारा एनजीओ के माध्यम से 30 मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए धनराशि दिए जाने के बावजूद मरीजों से पैसे वसूले जाने की शिकायतें सामने आईं। जब अभिलेख मांगे गए तो कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। आयुक्त ने गुरुवार सुबह 11 बजे तक सभी रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
निरीक्षण में यह भी उजागर हुआ कि केंद्र में नियमों के अनुसार मानसिक चिकित्सक, फिजिशियन और मेडिकल ऑफिसर की अनिवार्य तैनाती नहीं है। मौके पर केवल एक मानसिक चिकित्सक तैनात पाया गया, वह भी नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते। मरीजों को दवाएं कर्मचारियों द्वारा लिखे जाने की जानकारी सामने आई, जिसे आयुक्त ने नियमों का खुला उल्लंघन बताया।
हाल ही में एक महिला को केंद्र में उपचार के नाम पर भर्ती किया गया था, जबकि वह नशे की आदी भी नहीं थी। जब उसका विवरण मांगा गया तो उसका नाम किसी भी रजिस्टर में दर्ज नहीं मिला। इस पर आयुक्त ने कड़ी फटकार लगाई।
इसके अलावा कई मरीजों के आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित अन्य मूल दस्तावेज केंद्र में जब्त कर रखे जाने का मामला सामने आया। आयुक्त ने इसे कानूनन अपराध बताते हुए स्पष्ट किया कि मरीज के केंद्र छोड़ने के बाद उसके मूल दस्तावेज अपने पास रखना अवैध है।
मरीजों से धनराशि वसूले जाने के बावजूद उसका कोई रिकॉर्ड न होना भी सामने आया। इस पर केंद्र संचालक को कड़ी चेतावनी देते हुए आयुक्त ने कहा कि सरकार की ओर से निःशुल्क उपचार के लिए बजट उपलब्ध कराया जाता है, ऐसे में मरीजों से पैसा लेना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
अंततः आयुक्त ने मौके पर ही नशा मुक्ति केंद्र का लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश जारी कर दिए। साथ ही चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र में संचालित अन्य नशा मुक्ति केंद्रों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरों का पिछले 15 दिनों का फुटेज भी तलब किया गया है।
निरीक्षण के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल सिंह चौहान, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्वेता भंडारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

उत्तराखंड