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सोयाबीन कॉम्प्लेक्स के ध्वस्तीकरण पर प्रशासन की नजर!
एसडीएम ने किया निरीक्षण, शुरू से अब तक की कार्रवाई का रिकॉर्ड तलब, यूपीसीएल के पोलों के निस्तारण की भी होगी जांच!
हल्दूचौड़। उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) के सोयाबीन एवं वनस्पति कॉम्प्लेक्स हल्दूचौड़ में चल रहे ध्वस्तीकरण कार्य को लेकर उठ रही शिकायतों का प्रशासन ने संज्ञान लिया है। गुरुवार को एसडीएम रेखा कोहली ने परिसर का निरीक्षण कर ध्वस्तीकरण कार्य की स्थिति देखी। उन्होंने यूसीएफ प्रबंधक त्रिलोचन पाठक को ध्वस्तीकरण शुरू होने से अब तक की पूरी कार्रवाई का विवरण शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही परिसर में मौजूद यूपीसीएल के विद्युत पोलों को स्क्रैप में बेचे जाने की शिकायत की भी गहनता से जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
एसडीएम ने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच की जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से रिकॉर्ड तलब किए जाने के बाद अब ध्वस्तीकरण की स्वीकृति, टेंडर प्रक्रिया, भवनों की स्थिति, ध्वस्तीकरण से निकली सामग्री और उसके निस्तारण से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
सोयाबीन कॉम्प्लेक्स परिसर में ध्वस्तीकरण के दौरान जमीन की खुदाई और वहां से निकलने वाली सामग्री को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। प्रशासन यह भी देखेगा कि ध्वस्तीकरण और समतलीकरण के लिए कितनी खुदाई जरूरी थी और मौके पर वास्तव में कितनी खुदाई की गई। खुदाई से निकलने वाली मिट्टी, पत्थर अथवा उप खनिज नुुमा अन्य सामग्री की मात्रा तथा उसके परिवहन से संबंधित रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया जाएगा।
इधर कार्य में अनियमितताओ की चर्चाओं के बीच यूसीएफ ने भी ध्वस्तीकरण स्थल पर निगरानी बढ़ा दी है। मौके पर एक अवर अभियंता को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जेई की निगरानी में ध्वस्तीकरण स्थल से निकलने वाले मलबे और अन्य सामग्री की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही मलबा अथवा अन्य सामग्री बाहर ले जाने की अनुमति दिए जाने की बात कही गई है।
ध्वस्तीकरण कार्य की तकनीकी निगरानी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गुरुवार को एसडीएम की मौजूदगी में मीडिया कर्मियों ने यूसीएफ प्रबंधक से पूछा कि ध्वस्तीकरण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं और इसकी निगरानी कौन कर रहा है। प्रबंधक ने बताया कि निगरानी की जिम्मेदारी गोदाम प्रभारी को दी गई है। इसके बाद यह सवाल उठा कि ध्वस्तीकरण जैसे तकनीकी कार्य के मानकों का आकलन करने के लिए सक्षम तकनीकी अधिकारी की भूमिका क्या है।
इसी बीच संज्ञान में आया कि यूसीएफ की ओर से कार्य शुरू किए जाने के तकरीबन तीन माह बाद अब अवर अभियंता को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है । अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जेई को किस स्तर पर और किन जिम्मेदारियों के साथ तैनात किया गया है तथा क्या पहले हो चुके ध्वस्तीकरण कार्य की भी तकनीकी समीक्षा की जाएगी।
परिसर में मौजूद यूपीसीएल के विद्युत पोलों के निस्तारण को लेकर सामने आई शिकायत को एसडीएम ने गंभीरता से लिया है। अब जांच में यह देखा जाएगा कि पोल किस विभाग की संपत्ति थे, उन्हें हटाने की अनुमति किसने दी, उनका निस्तारण किस प्रक्रिया के तहत किया गया और इससे संबंधित अभिलेख उपलब्ध हैं या नहीं। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
कॉम्प्लेक्स के नंबर-1 गोदाम के ध्वस्तीकरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ वर्ष पहले इसकी मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। ऐसे में मरम्मत पर खर्च धनराशि, गोदाम की तकनीकी स्थिति और उसे ध्वस्त करने के निर्णय से जुड़े अभिलेख भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यूसीएफ प्रबंधक त्रिलोचन पाठक ने ध्वस्तीकरण कार्य में किसी भी अनियमितता से इनकार किया है। उनका कहना है कि कॉम्प्लेक्स में ध्वस्तीकरण का कार्य विधिवत टेंडर प्रक्रिया के तहत कराया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं नियमानुसार है।
फिलहाल किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एसडीएम के निरीक्षण और रिकॉर्ड तलब किए जाने के बाद अब जांच में मौके की स्थिति और दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि ध्वस्तीकरण से लेकर मलबे और अन्य सामग्री के निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई है या नहीं।

बाक्स।
अब अभिलेखों की जांच के बाद ही बाहर जाएगा मलबा।
हल्दूचौड़। सोयाबीन एवं वनस्पति कॉम्प्लेक्स में ध्वस्तीकरण कार्य की निगरानी के लिए हाल ही में तैनात किए गए अवर अभियंता ने बताया कि ध्वस्तीकरण स्थल पर निकलने वाले मलबे और अन्य सामग्री की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही है। मौके से सामग्री बाहर ले जाने से पहले उससे संबंधित सामग्री और उसके अभिलेखों की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि ध्वस्तीकरण के दौरान निकली सामग्री की प्रकृति और मात्रा का भी मिलान किया जाएगा। जमीन की खुदाई और उससे निकलने वाली सामग्री को लेकर सामने आई शिकायतों के तथ्यों की भी पड़ताल की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही नियमों के अनुरूप सामग्री को परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि निगरानी का उद्देश्य ध्वस्तीकरण कार्य को व्यवस्थित और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप सुनिश्चित करना है।

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