








आरटीओ कार्यालय में गोलीकांड पर गिरी गाज, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी निलंबित!
बिना अनुमति दफ्तर में लाए थे शस्त्र, कर पंजीयन अनुभाग के बाहर चलाई गोली, कर्मचारियों और आमजन में फैली दहशत।
हल्द्वानी। संभागीय परिवहन कार्यालय हल्द्वानी में कल हुई फायरिंग की घटना ने परिवहन विभाग में हड़कंप मचा दिया। कार्यालय में बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के शस्त्र लाने और कर पंजीयन अनुभाग के बाहर उससे फायर करने के मामले में परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी महेन्द्र सिंह नेगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
परिवहन आयुक्त उत्तराखंड की ओर से दो सितंबर को जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), हल्द्वानी की आख्या के अनुसार महेन्द्र सिंह नेगी एक सितंबर को बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के शस्त्र लेकर कार्यालय पहुंचे थे। इसी दिन शाम करीब 3:40 बजे कार पंजीयन अनुभाग के बाहर शस्त्र से फायर किया गया।
कार्यालय जैसे संवेदनशील सरकारी परिसर में गोली चलने से वहां मौजूद कर्मचारियों और जनसामान्य में भय का माहौल पैदा हो गया। आदेश के अनुसार इस घटना से राजकीय कार्य भी बाधित हुआ। विभाग ने प्रथम दृष्टया इसे उत्तराखंड कर्मचारी आचरण नियमावली, 2002 के नियम 3(1) एवं 3(2) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन माना है।
आरोप गंभीर, दोष सिद्ध हुआ तो हो सकती है बड़ी सजा!
परिवहन आयुक्त के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महेन्द्र सिंह नेगी के विरुद्ध लगाए गए अभिकथन गंभीर प्रकृति के हैं। यदि जांच में आरोप स्थापित होते हैं तो उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति लगाई जा सकती है। इसी आधार पर उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के नियम 4(1) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निलंबन के दौरान महेन्द्र सिंह नेगी को उपसम्भागीय परिवहन कार्यालय, ऊधमसिंह नगर से संबद्ध किया गया है। आदेश में उनके निलंबन काल के दौरान देय जीवन निर्वाह भत्ते और अन्य प्रतिकर भत्तों का भी उल्लेख किया गया है।
सरकारी दफ्तर में शस्त्र और फिर फायरिंग ने खड़े किए गंभीर सवाल
आरतियों जैसे कार्यालय में जहां रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी और आम नागरिक अपने काम से पहुंचते हैं, वहां शस्त्र लेकर पहुंचने और कार्यालय परिसर में फायरिंग की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय आदेश के बाद अब इस मामले में आगे होने वाली जांच और कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है।
फिलहाल विभाग ने निलंबन की कार्रवाई कर साफ संकेत दिया है कि सरकारी कार्यालय में अनुशासनहीनता और कर्मचारियों व आमजन की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
