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वैश्विक कृषि संकट के बीच नैनो उर्वरकों पर मंथन, किसानों को सिखाए जाएंगे भविष्य की खेती के गुर!

वैश्विक संकट के दौर में नैनो उर्वरकों पर मंथन, किसानों को बताए जाएंगे टिकाऊ खेती के नए उपाय!

दर्पण न्यूज 24/7, फूलपुर (प्रयागराज)।

दुनिया भर में बढ़ती खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की घटती उर्वरता और रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती लागत के बीच मोतीलाल नेहरू किसान प्रशिक्षण संस्थान, फूलपुर में आयोजित चार दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का तीसरा दिन नैनो उर्वरकों और आधुनिक कृषि तकनीकों को समर्पित रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक संकट के दौर में कम लागत और अधिक उत्पादन वाली तकनीकें ही कृषि को टिकाऊ बना सकती हैं।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को नैनो यूरिया, नैनो डीएपी तथा अन्य उन्नत उर्वरकों के उपयोग, उनके वैज्ञानिक लाभ और फसल उत्पादन में उनकी भूमिका की जानकारी दी जाएगी। कृषि वैज्ञानिक बताएंगे कि कैसे जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, बढ़ती उत्पादन लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

विशेषज्ञ किसानों को यह भी बताएंगे कि भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) द्वारा चलाए जा रहे ‘नैनो उर्वरक जागरूकता महाअभियान’ का उद्देश्य नई कृषि तकनीकों को खेत-खेत तक पहुंचाना है। अभियान के तहत वैज्ञानिक सीधे किसानों के खेतों में पहुंचकर नैनो उर्वरकों का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे किसानों को इनके प्रभाव और उपयोग की प्रत्यक्ष जानकारी मिल रही है।

प्रशिक्षण में संतुलित पोषण प्रबंधन, कृषि लागत में कमी, मिट्टी एवं पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों के कुशल उपयोग तथा टिकाऊ खेती के मॉडल पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही कृषि ड्रोन के माध्यम से उर्वरकों के छिड़काव और डिजिटल कृषि तकनीकों की जानकारी भी किसानों को दी जाएगी।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों का समन्वय आवश्यक हो गया है। ऐसे समय में नैनो उर्वरक न केवल उत्पादन बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं, बल्कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर मिट्टी की सेहत सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संस्थान के अधिकारियों के अनुसार आज का प्रशिक्षण सत्र शीघ्र प्रारंभ होगा, जबकि समापन दिवस पर किसानों को कृषि नवाचार, जलवायु-स्मार्ट खेती और भविष्य की कृषि चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों की जानकारी दी जाएगी। क्षेत्र के किसान बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लेकर विशेषज्ञों से सीधे संवाद करेंगे।

 

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