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उर्वरक की पाठशाला में किसानों को दिए गए आधुनिक खेती के गुर, नैनो उर्वरकों के उपयोग पर जोर!

दर्पण न्यूज 24/7 फूलपुर (प्रयागराज)। भारत सरकार के उर्वरक विभाग द्वारा संचालित ‘उर्वरक की पाठशाला’ अभियान के तहत बुधवार को विकासखंड क्षेत्र के खानपुर डांडी गांव में किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इफको कारडेट के समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (आईआरडीपी) के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक करना तथा नैनो और जैविक उर्वरकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इस अवसर पर किसानों को नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी, नैनो जिंक, नैनो कॉपर, जैव उर्वरकों एवं जैव अपघटकों के उपयोग और उनके लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई।

मुख्य अतिथि इफको फूलपुर इकाई के जनसंपर्क अधिकारी स्वयं प्रकाश ने कहा कि कृषि क्षेत्र में तेजी से नवाचार हो रहे हैं और नैनो उर्वरक खेती की तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने बताया कि कम मात्रा में उपयोग होने के बावजूद नैनो उर्वरक अधिक प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं, जिससे किसानों की उत्पादन लागत घटती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है। उन्होंने विभिन्न फसलों में नैनो उर्वरकों के सफल प्रयोग के उदाहरण भी प्रस्तुत किए।

सहगल फाउंडेशन के दिनेश मौर्य ने किसानों को खेतों में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने तथा जैविक खेती की तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। वहीं उर्वरक विभाग के शत्रुघ्न प्रसाद, आलोक पांडे और उनकी टीम ने अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में आ रही गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए संतुलित उर्वरक प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के अंत में आईआरडीपी प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने किसानों की समस्याओं को सुना और उनके समाधान पर चर्चा की। प्रगतिशील किसान रणजीत सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए किसानों से नियमित मिट्टी परीक्षण कराने तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खेती करने का आह्वान किया।

ग्रामीण किसानों ने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में उपयोगी बताते हुए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने की मांग की।