होर्मुज पर टकराव तेज: ट्रंप की खुली चेतावनी—जलडमरूमध्य नहीं खोला तो ईरान के ऊर्जा ठिकाने होंगे निशाने पर!
वाशिंगटन/तेहरान/मध्य-पूर्व ब्यूरो।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज करने के संकेत देते हुए कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री यातायात के लिए तत्काल नहीं खोला गया, तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और प्रमुख पुलों को निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी—“समय तेजी से खत्म हो रहा है, 48 घंटे बाद परिणाम बेहद विनाशकारी होंगे।”
इस बीच, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान द्वारा अमेरिकी लड़ाकू विमान मार गिराने के बाद लापता सैन्यकर्मी को अमेरिका ने सुरक्षित निकाल लिया है। बताया गया कि पायलट घायल है, लेकिन खतरे से बाहर है। बचाव अभियान में दर्जनों विमान लगाए गए और उसकी लोकेशन पर 24 घंटे नजर रखी गई।
खाड़ी क्षेत्र में ईरानी ड्रोन हमलों ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। कुवैत में दो बिजली संयंत्रों को भारी नुकसान पहुंचा, जबकि एक जल विलवणीकरण संयंत्र ठप हो गया। बहरीन में राष्ट्रीय तेल कंपनी के भंडारण केंद्र में आग लग गई, वहीं संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित पेट्रोकेमिकल प्लांट में भी हमले के बाद आग भड़क उठी।
कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें फिलहाल धूमिल नजर आ रही हैं। हालांकि पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र मध्यस्थता में जुटे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रगति बेहद धीमी है। ईरान के सैन्य नेतृत्व ने भी पलटवार की चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसके बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ तो “दुश्मनों के लिए जहन्नुम के दरवाजे खोल दिए जाएंगे।”
वैश्विक असर: अमेरिका में महंगाई बेकाबू!
युद्ध का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है। अमेजन ने डिलीवरी पर ईंधन अधिभार लगा दिया है, जबकि एयरलाइंस ने बैगेज शुल्क बढ़ा दिए हैं। अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 4.09 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो हाल के वर्षों का उच्चतम स्तर है। डीजल भी 5.53 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुका है, जिससे कृषि, परिवहन और निर्माण क्षेत्रों पर भारी दबाव पड़ रहा है।
28 फरवरी से अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के साथ शुरू हुआ यह संघर्ष अब वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है। हजारों लोगों की जान जा चुकी है, समुद्री आपूर्ति मार्ग बाधित हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी उथल-पुथल मची हुई है।
स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है—अब नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या आखिरी समय में कूटनीति युद्ध को रोक पाएगी या मध्य-पूर्व एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
