दर्पण न्यूज 24/7 एक्सक्लूसिव
परिवार रजिस्टर में गड़बड़ी पर धामी सरकार सख्त
सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं : मुख्यमंत्री
प्रदेशभर में सीडीओ–एडीएम स्तर के अधिकारी करेंगे जांच, 2003 से अब तक की होगी पड़ताल
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | देहरादून
उत्तराखंड में परिवार कुटुंब रजिस्टर में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारियों के पास सुरक्षित रखी जाएं, ताकि अभिलेखों में किसी भी प्रकार की हेराफेरी की संभावना पूरी तरह समाप्त हो सके। इसके साथ ही यह निर्णय लिया गया कि परिवार रजिस्टरों की गहन जांच सीडीओ और एडीएम स्तर के अधिकारियों द्वारा कराई जाएगी, जिससे जांच निष्पक्ष और प्रभावी हो।
2003 से अब तक की होगी व्यापक जांच
बैठक में तय किया गया कि जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक रखा जाएगा, ताकि बीते वर्षों में हुई संभावित अनियमितताओं को भी चिन्हित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के विरुद्ध विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसमें नाम निरस्तीकरण के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों और लाभार्थियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
नियमों के तहत होती है परिवार रजिस्टर की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने बताया कि परिवार रजिस्टर का पंजीकरण और प्रतिलिपि सेवाएं पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के अंतर्गत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार कुटुंब रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है।
वर्तमान प्रविष्टियों के शुद्धिकरण और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया का प्रावधान भी नियमावली में है, जिसे अब और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाए जाने की तैयारी है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि:
परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्राप्त है।
अपील का अधिकार उप जिलाधिकारी (एसडीएम) के पास निहित है।
वर्तमान में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाएं “अपणी सरकार” पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सीमावर्ती जिलों में अनधिकृत बसावट पर चिंता
बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि बीते वर्षों में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए जाने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने परिवार रजिस्टर से संबंधित नियमावली में आवश्यक संशोधन की जरूरत महसूस की है।
2025 के आंकड़े: बड़ी संख्या में आवेदन, हजारों निरस्त
पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से संबंधित सेवाओं के लिए प्रदेशभर में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए।
1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच
नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन प्राप्त हुए
इनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकृत किए गए
जबकि 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन और अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए
विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जी प्रविष्टियों की आशंका की ओर संकेत करती है, जिसके चलते प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करने का निर्णय लिया गया है।
भविष्य में बनेगी स्पष्ट नीति, कैबिनेट में होगा प्रस्ताव
मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों सहित पूरे प्रदेश में समान रूप से जांच की जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में भेदभाव या ढिलाई न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को स्पष्ट नीति के तहत नियंत्रित कर कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा,
“सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।”
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
उच्चस्तरीय बैठक में
सचिव गृह शैलेश बगौली,
डीजीपी दीपम सेठ,
डीजीपी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार,
विशेष सचिव पंचायती राज डॉ. पराग धकाते,
निदेशक पंचायती राज निधि यादव
उपस्थित रहे।
