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पूर्व में मिली करोड़ों की योजनाओ के बावजूद आज बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है हल्दूचौड़!

सीएचसी तो है किंतु अल्ट्रासाउंड-एक्सरे सेवा है ठप, बदहाल सड़कें और बढ़ती नाराजगी ने खड़े किए कई सवाल।

दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़। हल्दूचौड़ क्षेत्र की मौजूदा स्थिति राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। विडंबना यह है कि जिन विकास योजनाओं का लाभ क्षेत्र आज उठा रहा है, उनमें से अधिकांश परियोजनाएं पूर्व में स्वीकृत हुई थीं। करोड़ों रुपये की लागत से बने अस्पताल, विद्यालय और अन्य विकास कार्य क्षेत्र की पहचान बने, लेकिन वर्तमान समय में लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करने को मजबूर हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हल्दूचौड़ इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे मशीनें मौजूद हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में सेवाएं ठप पड़ी हैं। परिणामस्वरूप गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गरीब मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों या अन्य शहरों का रुख करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास का अर्थ केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि उनमें सुविधाओं का संचालन भी है। यदि करोड़ों रुपये की मशीनें धूल फांक रही हों और मरीजों को सुविधा न मिल रही हो, तो यह व्यवस्था की विफलता का संकेत है।

स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ क्षेत्र की कई प्रमुख सड़कें भी बदहाल स्थिति में हैं। जगह-जगह गड्ढों और क्षतिग्रस्त मार्गों को लेकर जनता में लगातार नाराजगी देखी जा रही है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा कई बार समस्याएं उठाए जाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देने की चर्चाएं क्षेत्र में आम हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जनता ने बदलाव और विकास की उम्मीद में नए नेतृत्व पर भरोसा जताया था। लोगों को विश्वास था कि नई पीढ़ी का नेतृत्व क्षेत्र की पुरानी समस्याओं का समाधान करेगा और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। लेकिन आज स्थिति यह है कि जनता को अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगानी पड़ रही है।

आज क्षेत्र भ्रमण पर आए सांसद अजय भट्ट के समक्ष यह मुद्दा उठाए जाने के बाद अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे सेवाएं शुरू कराने की दिशा में पहल हुई है। इससे क्षेत्रवासियों को उम्मीद जगी है कि वर्षों से लंबित समस्या का समाधान हो सकेगा।

फिलहाल क्षेत्र में एक ही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है”जब पूर्व में स्वीकृत करोड़ों की योजनाएं आज भी क्षेत्र की पहचान बनी हुई हैं, तो वर्तमान समय में जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है?”

यह सवाल केवल स्वास्थ्य सेवाओं का नहीं, बल्कि विकास के उस मॉडल का भी है जिसमें भवन तो बन जाते हैं, लेकिन सुविधाएं लोगों तक नहीं पहुंच पातीं।

उत्तराखंड