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“दलबदल से ‘जोश’ या संगठन में ‘रोष’? कांग्रेस में बढ़ती खींचतान, 2027 से पहले सियासी संतुलन बिगड़ने के संकेत” !
देहरादून, प्रमोद बमेटा (ब्यूरो), दर्पण न्यूज 24/7।
उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस जहां भाजपा से आए नेताओं के सहारे अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी है, वहीं पार्टी के भीतर उभरता असंतोष और गुटबाजी उसकी रणनीति पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
कांग्रेस मुख्यालय में दलबदल कर आए नेताओं का स्वागत तो जोर-शोर से किया जा रहा है, लेकिन रामनगर ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी की सदस्यता टल जाना संगठन के भीतर खींचतान को उजागर करता है। सूत्रों की मानें तो पूर्व विधायक रणजीत रावत की असहमति के चलते यह निर्णय लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम से यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर तालमेल की कमी बनी हुई है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की नाराजगी ने भी सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है।
इधर, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के कांग्रेस में शामिल होते ही विवाद खड़ा हो गया है। रुद्रपुर की पूर्व पालिकाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक मीना शर्मा ने पार्टी नेतृत्व पर महिला सम्मान की अनदेखी का आरोप लगाते हुए अपनी जिम्मेदारियों से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उन्होंने ठुकराल के पुराने विवादित बयान को मुद्दा बनाते हुए कहा कि ऐसे नेताओं को तरजीह देना समर्पित कार्यकर्ताओं के मनोबल को ठेस पहुंचाता है।
इस बीच, पूर्व विधायक नारायण पाल का कांग्रेस में शामिल होना भी सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे रहा है। हालांकि, उनके दल बदल के इतिहास और चुनावी प्रदर्शन को लेकर संगठन के भीतर चर्चाएं जारी हैं।
भाजपा ने कांग्रेस की इस रणनीति पर तीखा प्रहार किया है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस अब अपने ही कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं कर पा रही है और बाहर से आए नेताओं के सहारे चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस दलबदल के जरिए तात्कालिक मजबूती तो हासिल करना चाहती है, लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और अंदरूनी मतभेद पार्टी के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। यदि समय रहते संगठनात्मक संतुलन नहीं साधा गया, तो 2027 की चुनावी जंग में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।

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