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ब्लैक लिस्टेड इकाइयों के पुनर्जीवन की चर्चा, पुरानी फाइलों ने बढ़ाई चिंता!

यूएमपीएल और सीडीएफ को फिर सक्रिय करने की तैयारी के बीच अधोमानक दवाओं और आपूर्ति में मिली विसंगतियों का रिकॉर्ड सामने!

दर्पण न्यूज 24/7 संवाददाता, हल्दूचौड़।

उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) की हल्दूचौड़ स्थित यूएमपीएल और रानीखेत की को-ऑपरेटिव ड्रग फैक्टरी (सीडीएफ) को दोबारा सक्रिय करने की कवायद के बीच इन इकाइयों से जुड़े पुराने सरकारी रिकॉर्ड चर्चा में आ गए हैं। वर्ष 2024 और 2025 में अधोमानक दवाओं के सामने आए मामले, दवा आपूर्ति से जुड़े अभिलेखों में दर्ज विसंगतियां और संबंधित फर्मों पर हुई कार्रवाई अब पुनर्जीवन की मौजूदा प्रक्रिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो गई हैं।

आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं उत्तराखंड के निदेशक डा. आरपी सिंह के अनुसार अधोमानक दवाओं के मामलों में यूएमपीएल हल्दूचौड़ और सीडीएफ रानीखेत के खिलाफ ब्लैक लिस्टेड करने और अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई पूर्व में की जा चुकी है। ऐसे में दोनों इकाइयों को दोबारा सक्रिय किए जाने के साथ उनकी वर्तमान प्रशासनिक और अनुबंधीय स्थिति भी महत्वपूर्ण हो गई है।

सीडीएफ की तीन दवाएं जांच में मिलीं अधोमानक!

सीडीएफ रानीखेत से जुड़े रिकॉर्ड के अनुसार राजकीय आयुर्वेदिक औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, हरिद्वार की 25 जून 2024 की जांच रिपोर्ट में सीडीएफ की तीन औषधियां-अर्जुनारिष्ट, अश्वगंधारिष्ट और शंखवटी-निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं।

रिपोर्ट के अनुसार अर्जुनारिष्ट में कुल ठोस पदार्थ और अल्कोहल की मात्रा निर्धारित सीमा से कम मिली। अश्वगंधारिष्ट में भी कुल ठोस पदार्थ और अल्कोहल की मात्रा मानक से कम पाई गई। वहीं शंखवटी के नमूने में बाह्य पहचान और हींग परीक्षण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले। पानी में घुलनशील अर्क और पीएच मान भी निर्धारित सीमा से कम दर्ज किया गया।

राजकीय विश्लेषक ने तीनों नमूनों को मानक गुणवत्ता का नहीं माना था।

इसके बाद छह जुलाई 2024 को तत्कालीन लाइसेंसिंग अधिकारी डा. मिथिलेश कुमार ने संबंधित औषधियों की बिक्री तत्काल रोकने और बाजार में आपूर्ति की जा चुकी दवाओं को वापस मंगाने के निर्देश दिए थे। संबंधित फर्म से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।

आपूर्ति अभिलेखों में भी सामने आई विसंगतियां।

वर्ष 2025 में सीडीएफ के माध्यम से रोनपाल बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा की गई औषधि आपूर्ति से जुड़े अभिलेखों में भी विसंगतियां दर्ज हुईं। एक जनवरी 2025 के सीडीएफ के पत्र में फर्म से बैच निर्माण अभिलेख, जड़ी-बूटियों के खरीद बिल, प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट और औषधियों के नमूने उपलब्ध कराने को कहा गया था। अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाने की बात पत्र में दर्ज थी।

बाद में बैच निर्माण अभिलेख में दर्ज कच्चे माल और प्रस्तुत खरीद बिलों के बीच अंतर भी सामने आया। आयुर्वेदाचार्य डा. योगेश कुमार की रिपोर्ट में अश्वगंधा की 801 किलोग्राम मात्रा के मुकाबले 90 किलोग्राम और अर्जुन छाल की 45 किलोग्राम मात्रा के मुकाबले 35 किलोग्राम खरीद दर्ज होने का उल्लेख किया गया। चार लीटर लवंग तेल के मुकाबले खरीद का विवरण भी उपलब्ध नहीं था।

रोनपाल बायोटेक पर हुई विभागीय कार्रवाई।

आयुष विभाग के एक अगस्त 2025 के कार्यालय आदेश के अनुसार रोनपाल बायोटेक द्वारा आपूर्ति की गई कई औषधियों के नमूने जांच में मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाए गए थे। राजकीय आयुर्वेदिक औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, हरिद्वार और देवांश परीक्षण एवं अनुसंधान प्रयोगशाला, रुड़की की रिपोर्टों के आधार पर संबंधित आपूर्ति आदेश निरस्त किए गए।

दस्तावेज के अनुसार फर्म को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। जवाब नहीं मिलने के बाद उसे तीन वर्ष के लिए ब्लैक लिस्टेड किया गया और विभागीय औषधि खरीद निविदाओं में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया।

नई मशीनरी लगी, अब गुणवत्ता व्यवस्था पर नजर।

यूएमपीएल हल्दूचौड़ को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया में नई मशीनरी लगाए जाने का भी सरकारी पत्राचार में उल्लेख है। जनवरी 2025 के पत्र के अनुसार ग्राइंडिंग मशीन, बेल्ट कन्वेयर, ड्रायर, डीह्यूमिडीफायर, 500 लीटर टैंक वाली आरओ मशीन, दो नई वजन कांटा मशीन और सीलिंग मशीन स्थापित की गई थीं। मशीनों का परीक्षण संचालन भी कराया गया था।

नई मशीनरी के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी है। ऐसे में पुराने मामलों के मद्देनजर अब गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर भी निगाह रहेगी।

पुरानी फाइलें बनीं पुनर्जीवन की कसौटी!

यूएमपीएल और सीडीएफ का पुनर्जीवन रोजगार और स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी सहकारी इकाइयों के दोबारा सक्रिय होने से स्थानीय स्तर पर उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।

हालांकि, दवा निर्माण का मामला सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण पुरानी कार्रवाई को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। पुनर्जीवन के साथ कच्चे माल की गुणवत्ता, बैच निर्माण अभिलेख, प्रयोगशाला जांच, नमूना परीक्षण, भुगतान और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाए रखना जरूरी होगा।

वर्ष 2024-25 के ये मामले भले ही पुराने हों, लेकिन वर्ष 2026 में दोनों इकाइयों के पुनर्जीवन की चर्चाओं के बीच इनका महत्व बढ़ गया है। अब निगाह इस बात पर है कि पुरानी कार्रवाई के बाद दोनों इकाइयों की वर्तमान स्थिति क्या है और नई व्यवस्था में गुणवत्ता नियंत्रण के लिए क्या प्रबंध किए जाते हैं।

आयुष विभाग और यूसीएफ का वर्तमान पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।

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