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कल मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा, गुरु चरणों में झुकेगा शीश!

29 जुलाई को रखा जाएगा व्रत, मंदिरों में होंगे विशेष पूजन-अनुष्ठान और हवन!

दर्पण न्यूज 24/7 हल्द्वानी। सनातन धर्म में गुरु को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया गया है। गुरु पूर्णिमा यानी व्यास पूर्णिमा का पावन पर्व इस बार 29 जुलाई, बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। पूर्णिमा तिथि बुधवार को सूर्योदय से रात 8:05 बजे तक रहेगी। ऐसे में गुरु पूर्णिमा का व्रत भी 29 जुलाई को ही रखा जाएगा। सनातन परंपरा में गुरु का विशेष महत्व है। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने संसार को ज्ञान का प्रकाश देने के लिए पुराणों की रचना की। उनकी जयंती को ही गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाने की परंपरा ऋषि-मुनियों के समय से चली आ रही है। गुरु पूर्णिमा के दिन शिक्षा गुरु से लेकर आध्यात्मिक गुरु तक के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के स्वरूप के समान माना गया है। मान्यता है कि गुरु की कृपा से व्यक्ति को जीवन में ज्ञान, संस्कार और सही मार्ग की प्राप्ति होती है।

प्राचीन वैदिक काल में गुरुकुलों में शिक्षा के साथ वेद-वेदांग और आध्यात्मिक ज्ञान भी प्रदान किया जाता था। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण ने भी गुरुकुल में रहकर अपने गुरुजनों से विभिन्न विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया था।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु अखंड रामायण पाठ, रुद्राभिषेक, गुरु पूजन, हवन और विशेष धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। कई श्रद्धालु अपने गुरुजनों के घर पहुंचकर उनका आशीर्वाद भी लेंगे। मान्यता है कि गुरु के बताए मार्ग पर चलना और उनके आदर्शों को जीवन में उतारना ही गुरु के प्रति सच्चा समर्पण है।

गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, श्रद्धा और समर्पण का उत्सव है। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि जीवन में सही दिशा दिखाने वाले गुरु का स्थान सर्वोच्च है और उनके आशीर्वाद से ही ज्ञान का प्रकाश जीवन को नई राह दिखाता है।

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